कांवड़ यात्रा के लिए जिले को 22 जोन और 62 सेक्टर में बांटा गया है। हर जोन और सेक्टर के प्रभारी बना दिए हैं। एडीएम सिटी दिवाकर सिंह ने दौराला तक निरीक्षण किया तो विद्युत विभाग की सबसे ज्यादा लापरवाही सामने आई। अभी तक लोहे के पोल पर पॉलिथीन नहीं बांधी गई हैं, जिसके कारण कहीं भी बड़ा हादसा हो सकता है।
दिल्ली रोड पर रैपिड का कार्य चल रहा है, ऐसे में रास्ते में जगह-जगह हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर, मोदीनगर, दिल्ली आदि जाने वाले रास्तों पर साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। सभी सेक्टर प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मार्ग में पड़ने वाले होटल-ढाबों पर खाने के सामान की रेट लिस्ट लगवाई दी जाए।
यातायात रूट डायवर्जन को लेकर हर मार्ग पर वैकल्पिक मार्ग की तलाश कर लें, ताकि समस्या आने पर इन मार्गों का इस्तेमाल किया जा सके। कई जगह सड़कों पर अभी भी गड्ढे नहीं भरे हैं, पीडब्लूडी और एनएचएआई के अधिकारियों को यहां पर पैचवर्क कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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जहां-जहां शिविर लगेंगे वहां संचालकों को ये बताने के लिए कहा गया है कि डिवाइडर पर कांवड़ का स्टैंड न बने, इससे दूसरी पटरी पर चलने वाले वाहनों और लोगों के कांवड़ से टकराने की संभावना हो सकती है। शिविरों में सभी सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट खाने की गुणवत्ता की जांच करेंगे। कलक्ट्रेट में बनाए गए कंट्रोल रूम में सारी सूचनाएं अपडेट की जाएंगी। सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई का रोजाना ध्यान रखा जाएगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग में पड़ने वाली मीट की दुकानें बंद रहेंगी। चिकित्सा शिविर कहां-कहां लगाए गए हैं, इसकी सूची भी सेक्टर-जोनल प्रभारी पर रहेगी। 14 जुलाई से कांवड़ मेले तक कोई भी अधिकारी बिना उच्चाधिकारियों को बताए जिले से बाहर नहीं जाएगा।
बम-बम भोले के उद्घोष से गूंजेंगी दिल्ली रोड
दिल्ली रोड पर प्रशासन ने पूर्व वर्षों की तरह कांवड़ियों के निकलने के लिए इंतजाम किए हैं। एक तरफ मार्ग पर कांवड़ चलती रहेगी। इस बीच अगर जरूरत पड़ी तो रैपिड रेल का कार्य भी बंद किया जाएगा।