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आईएसआई के संपर्क में आने के बाद जवान ने खरीदे थे दो सिमकार्ड, कश्मीर को लेकर हुई थी ये डील

Sat, 20 Oct 2018 12:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज
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मेरठ में सेना के जवान कंचन सिंह ने पाकिस्तान में आईएसआई को क्या-क्या सूचनाएं भेजी थी और कितनी बार उसने किस किस से संपर्क किया था?  इसका राज उसके दो मोबाइल फोन और चार सिम कार्डों में है। सेना के एक्सपर्ट इनकी डिटेल खंगालने में जुटे हैं। कंचन सिंह के दो मोबाइल नंबर उसके घर वालों के पास थे लेकिन अन्य दो नंबरों के बारे में किसी को खबर तक नहीं थी। इन चारों नंबर की सीडीआर खंगाली जा रही है। साथ ही आईटी एक्सपर्ट इनके डेटा रिकवर करने में लगे हुए हैं। 

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बागेश्वर (उत्तराखंड) के गढ़िया गांव का कंचन मेरठ में ढाई साल से सामरिक दृष्टि से बेहद अहम सिग्नल रेजीमेंट में तैनात था। जिसका काम युद्घ के समय सैन्य कम्यूनिकेशंस बनाए रखना और तमाम महत्वपूर्ण संदेशों को संबंधित तक बेहद गोपनीय तरीके से डिलीवर करना होता है।

यहां तैनाती के दौरान ही दस महीने पहले कंचन फोन कॉल्स के जरिए आईएसआई एजेंट के संपर्क में आया, जिसने उसे अपने जाल में फंसाकर रेजीमेंट और सैन्य क्षेत्र के बारे में जानकारियां हासिल कीं। कुछ दिन पहले इसकी जानकारी होने पर मिलिट्री इंटेलीजेंस ने निगरानी शुरू की और उसे दबोच लिया गया। 
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सैन्य सूत्रों के मुताबिक कंचन सिंह दो मोबाइल और चार सिम इस्तेमाल कर रहा था। इनमें से दो नंबर और एक सैमसंग जे-5 मोबाइल होने की जानकारी उसने सेना को दी थी। इनमें एक नंबर बीएसएनएल और एक वोडाफोन का था।

इनके अलावा दो अतिरिक्त सिम अलग से इस्तेमाल कर रहा था, जिन्हें आईएसआई एजेंट के संपर्क में आने के बाद खरीदे गए थे। एक सिम से व्हाट्सएप चलाकर गोपनीय सूचनाएं लीक करता था। पूछताछ में यह भी मालूम चला है कि हाल ही में जम्मू तबादला होने के बाद उससे कश्मीर की जानकारियां देने को कहा गया था। गौरतलब है कि एक पाकिस्तानी एक भारतीय अफसर कर्नल शर्मा बनकर  इस जवान से जासूसी करवा रहा था।

सेना के एक्सपर्ट जवान के सैमसंग जे-5 मोबाइल से डिलीट डेटा को रिकवर कर रहे हैं। इसके बाद ही लीक की गई सूचनाओं का सही आंकलन होगा। कंचन के पास जो दो मोबाइल मिले हैं उनमें से एक एंड्रोइड फोन उसे गिफ्ट किया गया है। सूत्रों की मानें तो ये मोबाइल आईएसआई द्वारा गिफ्ट किए जाने की बात सामने आ रही है। ये मोबाइल उसके पास तब से है जब वह घर छुट्टी पर गया था। ऐसे में कई दूसरे लोग भी सेना के रडार पर आ गए हैं। 
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