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Meerut News: तीन दिन की बारिश से पुराने स्वरूप में लौटी काली नदी

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लावड़ - देदला गांव से गुजर रही काली नदी में बारिश के बाद बहती जलधारा। स्रोत : संवाद
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- तमाम कोशिश के बाद भी नदी में नहीं बह सकी जलधारा
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- मुजफ्फरनगर के गांव अंतवाड़ा से निकलने वाली करीब 460 किलोमीटर लंबी काली नदी कन्नौज से पहले गंगा नदी में मिलती है
संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़ (मेरठ)। लगातार तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली काली नदी को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। वर्षों से सूखी पड़ी और गांवों के गंदे पानी की धारा तक सीमित रह गई काली नदी में अब बारिश का पानी बहता दिखाई दे रहा है। नदी का बदला स्वरूप देखकर इसके किनारे बसे गांवों के लोगों के चेहरे खिल उठे हैं। ग्रामीण इसे प्रकृति का ऐसा उपहार मान रहे हैं, जिसने वर्षों बाद काली नदी का शृंगार कर दिया।
जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा खतौली क्षेत्र के गांव अंतवाड़ा से निकलने वाली करीब 460 किलोमीटर लंबी काली नदी कन्नौज से पहले गंगा नदी में जाकर मिलती है। कभी यह नदी क्षेत्र की सिंचाई, भूजल संरक्षण और पर्यावरण का प्रमुख आधार थी, लेकिन समय के साथ अतिक्रमण, प्रदूषण और जल स्रोतों के कमजोर होने से इसका अस्तित्व संकट में पड़ गया। हालत यह हो गई कि अधिकांश हिस्सों में नदी सूखी रहने लगी और उसमें केवल गांवों का गंदा पानी ही बहता दिखाई देता था लेकिन तीन दिनों तक लगातार हुई बारिश ने स्थिति बदल दी है। वर्षा का पानी नदी में पहुंचने से उसमें साफ जलधारा बहने लगी है। किनारों पर फैली हरियाली और बहते पानी का दृश्य देखकर ग्रामीणों की पुरानी यादें ताजा हो गईं।
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ग्रामीण परिवार के साथ नदी किनारे पहुंचे और बहते पानी को देखकर खुशी जताई। मीठेपुर निवासी 65 वर्षीय अजयवीर ने बताया कि बचपन में उन्होंने इसी नदी को पूरे वेग से बहते देखा था। शनिवार सुबह जब वह देदवा गांव से होकर गुजर रहे थे तो उन्होंने काली नदी का पुराना स्वरूप देखा। लंबे समय बाद ऐसा दृश्य फिर से देखने को मिला है। देदवा गांव निवासी दौराला ब्लॉक प्रमुख के पति ऋषिपाल भंडारी का कहना है कि मानसून सत्र में दो-चार बारिश इसी तरह हो जाए और नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया गया तो काली नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप की ओर लौट सकती है। उनका कहना है कि सरकार और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने समय-समय पर काली नदी के पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाए, सफाई कराई और कई योजनाएं भी बनाईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। इस बार प्रकृति ने जो काम किया है, उसने लोगों में नई उम्मीद जगा दी है।
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