वोट डालने के लिए लाइन में लगे मतदाता
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में हर राजनीतिक दल के लोग अपने हिसाब से आंकड़े लगा रहे हैं। कोई मान रहा है कि कम मतदान प्रतिशत गठबंधन के लिए खतरे की घंटी हो सकती है तो कोई मानता है कि कम मतदान प्रतिशत में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है। चुनाव नतीजों से ही यह होगा कि कम मतदान का किसे फायदा हुआ और किसे नुकसान।
गठबंधन के साथ जाते दिखे दलित
कैराना लोस सीट के उपचुनाव में हुए मतदान में दलित समाज गठबंधन के साथ जाता दिखाई दिया। यह बात अलग है कि उपचुनाव के प्रचार के दौरान एक भी बसपा नेता ने गठबंधन प्रत्याशी के चुनावी मंच को साझा नहीं किया और बसपा अध्यक्ष की तरफ से भी उपचुनाव के लिए रुख स्पष्ट नहीं किया गया था। इसके बावजूद खामोशी के साथ दलित समाज में भाजपा का विरोध बना रहा। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा प्रभाव दिखाई दिया। दलित समाज के लोगों का कहना था कि पूर्व में सहारनपुर के शब्बीरपुर कांड और दो अप्रैल को हुई घटनाओं की वजह से दलित समाज में भाजपा के प्रति नाराजगी है।
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