प्रदेश सरकार में मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह ने कहा कि जब मुख्यमंत्री से मुजफ्फरनगर, शामली के दंगे के मुकदमे वापस होने की वार्ता हुई, तो गठबंधन की प्रत्याशी के बेटे ने कहा था कि एक भी मुकदमा वापस हुआ, तो सड़कों पर धरना देंगे। यदि उनकी मां लोकसभा में पहुंचती है, तो एक भी मुकदमा वापस होने पर लोकसभा में भी धरना देंगी, वो शामली और मुजफ्फरनगर में शांति नहीं चाहते हैं। झगड़े और अशांति का क्षेत्र बनाना चाहते हैं। प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा ने कहा कि हर कार्यकर्ता का संकल्प है कि कैराना से उठाई गई बाबूजी की आवाज को दबने नहीं देंगे। गठबंधन प्रत्याशी पर सवाल उठाया कि जब शामली में बच्ची से अत्याचार हुआ था, उस समय यही सांसद थीं, लेकिन पीड़िता की बात तक सुनने नहीं पहुंची थीं।
आंवला (बरेली) से सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि प्रदेश के हालात दूसरी सरकारों के देखे होंगे। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान प्रदेश में दूसरे दल की सरकार थी। उस दंगे में रामलाल भी मारे गए थे और रमजानी भी। सरकार ने रमजानी की मदद की, लेकिन रामलाल के साथ नाइंसाफी की गई थी। उन्होंने कहा कि हमने एक ऐसे प्रधानमंत्री भी झेला, जो सरदार तो था, लेकिन असरदार नहीं था। कैराना लोकसभा के उपचुनाव में फैसला ए दोस्तों हो जाएगा तकदीर, कैराना में बजेगा डंका भाजपा की जीत का। इस दौरान राज्य मंत्री धर्म सिंह सैनी, सांसद संजीव बालियान, सांसद कांता कर्दम, सांसद विजयपाल सिंह तोमर, पूर्व मंत्री अशोक प्रधान, विधायक तेजेंद्र निर्वाल, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह सिरोही, पूर्व एमएलसी प्रशांत चौधरी, बुलंदशहर से विधायक संजय शर्मा, पूर्व एमएलसी मंगलसेन कोरी, पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी, पूर्व विधायक जगत सिंह, विधायक सोमेंद्र तोमर, विधायक जितेंद्र सतवाई, विधायक मंजू सिवाच, विधायक लोनी नंदकिशोर, विधायक प्रमोद उटवाल, विधायक विजय कश्यप, विधायक प्रदीप चौधरी, विधायक केपी मलिक, सूरत सिंह वर्मा, राजीव गुम्बर, वाईपी सिंह, विधायक विक्रम सैनी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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