लंबे समय से खोई सियासी जमीन को पाने के लिए रालोद ने कैराना लोकसभा सीट हथियाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। गठबंधन से हिस्से में आई इस सीट के लिए रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह जन संवाद कर टूटे भाईचारे को बहाल करने में लगे हैं। वहीं जयंत चौधरी गांव-गांव जाकर आक्रामक प्रचार कर रहे हैं। पार्टी ने नया दांव खेलते हुए जाटों को साधने के लिए ऑपरेशन 'रिश्तेदार' चालू कर दिया है। रिश्तेदारों में भी प्रभावशाली लोगों की मदद ली जा रही है। कुछ लोग तो अपनी रिश्तेदारी में डेरा डालकर लेट गए हैं।
बाबू हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई कैराना लोकसभा सीट जीतने के लिए जहां भाजपा ने पार्टी प्रत्याशी मृगांका के लिए अपने मंत्रियों के अलावा जाट नेताओं को उतार दिया है, वहीं रालोद ने भी गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन के लिए पूरा जोर लगा दिया है। पार्टी ने भाजपा की तर्ज पर ही जहां आईटी टीम गठित कर स्टार प्रचारकों की सूची घोषित कर दी है। भाजपा को मात देने के लिए जमीनी कार्य करने पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
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पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के कार्यक्रम जहां गांव-गांव लगाए जा रहे हैं। चौधरी अजित सिंह को जाटों के बड़े गांवों की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का फोकस बड़ी रैली न करके नुक्कड़ सभाओं और डोर टू डोर प्रचार पर है। जातिगत समीकरणों को साधने के लिए जाति से संबंधित नेताओं को लगा रखा है। लेकिन इन सबसे अलग पार्टी ने जाटों को मनाने के लिए ऑपरेशन 'रिश्तेदार' शुरू किया है। ऑपरेशन के तहत लोकसभा सीट के जाटों को उनके रिश्तेदारों से न केवल फोन कराकर रालोद के पक्ष में वोट करने को कहलवाया जा रहा है, बल्कि लोगों को रिश्तेदारों के पास भी भेजा जा रहा है। मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, से लेकर मथुरा तक के जाटों से उनके रिश्तेदारों को फोन कराए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि यह रणनीति सबसे ज्यादा कारगर साबित हो रही है।
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