‘सत्यानाशी’ बन रहा दूसरी वनस्पतियों के लिए काल
स्योहारा (बिजनौर)। दिखने में आकर्षक और रंग बदले फूल, सजावट के लिहाज से शानदार दिखने वाला पौधा लैंटाना कैमरा मैदानी क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रहा है। पर्यावरण के लिहाज से यह खतरनाक है और अपने आसपास के दूसरे पौधों को समाप्त कर देता है। स्योहारा के आसपास मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा एवं धामपुर मार्ग पर लैंटाना की झाड़ियां बहुत अधिक मात्रा में फैली हुई हैं। कुछ स्थानों पर तो यह हैं 13 से 14 फीट ऊंचाई तक की दिखाई देती हैं। झाड़ियोंनुमा इस पौधे को गांवों में सत्यानाशी भी कहा जाता है। इसकी गंध इतनी तीखी है कि जानवर भी इसके पास से नहीं गुजरते। भूमि की उर्वरक क्षमता भी इससे प्रभावित हो रही हैं।
पहले इस खरपतवार को सजावट की वस्तु माना जाता था। लेकिन इसके विस्तार ने ने यह बात मानने पर मजबूर कर दिया कि यह कोई लाभदायक खत्म खरपतवार नहीं बल्कि एक खतरनाक पौधा है। क्षेत्र में आया यह पौधा अब विकराल रूप लेता जा रहा है। जहां यह पौधा पैदा होता है उसके आसपास के क्षेत्र को धीरे-धीरे बंजर होता चला जाता है। इस पौधे के नीचे उगने वाली घास एवं पत्तियां स्वत: ही नष्ट होती चली जाती हैं। कहते हैं कि भारत के आजादी के बाद 1950 के दशक में अमेरिका से गेहूं की आपूर्ति खाद्य समस्या को हल करने के लिए मंगाई गई थी। उस समय यह है अनाज के साथ बीजों के रूप में भारत पहुंची। क्षेत्र के वनस्पति प्रेमी लैंटाना में लगातार आते जा रहे परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं। पर्यावरणविद डा. विनीत देवरा का कहना है कि लैंटाना झाड़ियां व घास वन भूमि, कृषकों की उपजाऊ भूमि में तेजी से फैल रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो खेती व वन भूमि में खेती व वनों के अस्तित्व को भी खतरा पैदा हो जाएगा। (संवाद)
-लैंटाना के फैलने से जंगल में अन्य घास खत्म होती जा रही है। इससे जंगलों में जानवरों की विचरण करने, चारे और उनके छिपने की जगह कम हो रही है। उनके प्राकृतिक वास स्थल नष्ट हो रहे हैं और वह आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। गजेंद्र सिंह प्रजापति, प्रधानाचार्य दक्ष इंटर कालेज
-पर्यावरण में गर्मी के बढ़ जाने से लैंटाना के फूलों के रंग अब अधिक चटक होते जा रहे हैं। इस फूल के पौधे को ग्रामीण क्षेत्र में कुरी और सत्यानाशी के नामों से भी जाना जाता है। झाड़नुमा बरवाने सी कुल के इस फूल झाड़ी का वैज्ञानिक नाम लैंटाना कैमरा हैं। कांता प्रसाद पुष्पक, प्रवक्ता आरएसपी इंटर कालेज
-लैंटाना घास तेजी से भूमि को बंजर बनाती है। धीरे-धीरे भूमि का उपजाऊपन खत्म होने के साथ इससे स्किन एलर्जी भी होती है। तेजी से फैलने वाली यह घास चारे के काम भी नहीं आती। यदि कोई पशु गलती से इसे खा ले, तो इससे उसे नुकसान पहुंचता है। नौबहार सिंह, रिटायर्ड एमडी, सहकारी समिति
जरा से घर्षण से पकड़ लेती है आग
गर्मियों के मौसम में इसकी सूख रही पत्तियां एवं झाड़ियां क्षेत्र को भीषण गर्मी में आग की दावत देती हैं। ग्रीष्मकाल में लैंटाना झाड़ियां आग का भी प्रमुख कारण बनती हैं, क्योंकि इसकी पत्तियां तरल होती हैं, जो जरा सा भी घर्षण होने पर आग पकड़ लेती हैं।
स्योहारा क्षेत्र में खिले लैंटाना के फूल।- फोटो : BIJNOR