उनकी प्रतिमा पर लिखी शहादत और अनावरण की तारीख ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। हाल ही में नगर निगम ने उनकी प्रतिमा की अनावरण की तारीख को ठीक करने के बजाया शहादत की तारीख गलत कर किरकिरी कराई थी। इस मामले को भी सबसे पहले अमर उजाला ने ही उठाया था। बाद में गलती को ठीक किया गया।
13 जून 1999 को दी थी शहादत
1992 में कमीशन प्राप्त कर लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त हुए। प्रथम तैनाती जम्मू कश्मीर में हुई। इसके बाद उन्होंने कारगिल में 19 हजार फीट ऊंची खड़ी चोटी पर घुसपैठियों को खदेड़कर अपना शौर्य दिखाया था। 13 जून 1999 को वह शहीद हो गए।
इस कार्य को अमर उजाला ने लगातार उठाया। हमने अधिकारियों को निर्देश देकर प्रतिमा पर कई कार्य कराए। प्रतिमा पर एलईडी लाइट लगवाई गई हैं। शहीद को सम्मान देने की जिम्मेदारी हमारी थी, उसे पूरा कर दिया गया। - मृदुल चौधरी, एमडीए उपाध्यक्ष