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जज्बा: 21 दिन में 3775 किमी साइकिल चलाकर दिया फिटनेस का मंत्र, बोले-सेहत की भी हो कुंडली

Tue, 22 Nov 2022 02:03 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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डॉ. अनिल नौसरान - फोटो : amar ujala
जो गिरने से डरते हैं, वे कभी उड़ान नहीं भर सकते....इसी तरह का जोश दिखा मेरठ शाखा में रहने वाले पूर्व सचिव और वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डॉ. अनिल नौसरान में। उन्होंने अपने मकसद को पूरा कर लोगों को स्वास्थ के प्रति जागरूक किया है। जिसमें अनिल ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक साइकिल पर यात्रा पूरी कर ली है। डॉ. नौसरान लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूक करने के मकसद से एक नवंबर को कश्मीर से चले और 21 नवंबर तक 3775 किलोमीटर का सफर तय किया। वह बुधवार को मेरठ लौटेंगे।

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जानकारी के अनुसार डॉ. नौसरान ने औसतन 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रोज करीब 200 किमी साइकिल चलाई है। उन्होंने 24 घंटे के अंदर सिर्फ शाम को ही भोजन किया है। नाश्ते में सेब, पपीता, कीवी और अमरूद ही खाया। साथ ही शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए एक निश्चित अंतराल पर नारियल पानी भी लिया है।
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लोगों को स्वास्थ के प्रति जागरूक किया - फोटो : amar ujala
सफर को दिया 'के-2-के' अवेयरनेस यात्रा नाम 
उन्होंने इस सफर को के-2-के अवेयरनेस यात्रा का नाम दिया है। करीब 52 वर्ष की आयु में इतनी लंबी साइकिल यात्रा कर उन्होंने विभिन्न शहरों में लोगों को शादी से पहले एचआईवी जांच कराने और साइकिल चलाकर स्वस्थ रहने का संदेश दिया है।
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बातचीत करते डॉ० अनिल - फोटो : amar ujala
शादी से पहले बनवाएं सेहत की कुंडली
डॉ. नौसरान ने यात्रा के दौरान लोगों को बताया कि जिस तरह लोग शादी से पहले कुंडलियां बनवाते हैं, उसी तरह सेहत की भी कुंडली बनवानी चाहिए। इसके लिए एचआईवी जांच जरूर कराएं, ताकि आनी वाली नस्ल सेहतमंद हो।

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समूद्र के किनारे बैठे डॉ० अनिल - फोटो : amar ujala
साथ ही उन्होंने बताया कि वह दिन में साइकिल चलाते थे और रात में रुकते भी थे। मेरठ के किसी चिकित्सक ने लोगों को सेहत के प्रति सचेत करने के लिए पहली बार इतनी लंबी साइकिल यात्रा की है।
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फल खाते डॉ० नौसरान - फोटो : amar ujala
पहले भी कर चुके हैं लंबी यात्राएं
डॉ. नौसरान समय-समय पर साइकिल यात्राएं करते रहे हैं। पूर्व में वह मेरठ से कोलकाता, करनाल, सोनीपत, दिल्ली तक साइकिल यात्रा कर चुके हैं। वह कहते हैं कि साइकिल चलाने से मनुष्य शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। साइकिल को अगर लोग नियमित दिनचर्या का हिस्सा बना लें तो देश में ईंधन की बचत होने के साथ-साथ प्रदूषण भी कम होगा। पार्किंग की समस्या का भी निराकरण होगा और लोग फिट रहेेंगे।
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