जाट आंदोलन की आग हरियाणा से निकलकर पश्चिमी यूपी में फैलने लगी है, जो आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए परेशानी बन सकती है। रालोद के सक्रिय होने से मुसीबत और बढ़ गई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 19 जनपद जाट बहुल हैं। इनमें 122 विधानसभा सीटें आती हैं। इन विधानसभा सीटों में करीब 70 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां जाट बिरादरी सीधे-सीधे चुनाव प्रभावित करती हैं। जाट बहुल बेल्ट की बदौलत ही रालोद पश्चिम क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करता रहा है। इस बार लोकसभा चुनाव में पश्चिम क्षेत्र के जाटों ने भाजपा को खुलकर वोट दिया।
इसके चलते पश्चिम की तमाम सीटें भाजपा की झोली में चली गईं। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। जाट आरक्षण की मांग यूपी का जाट भी करता रहा है। लेकिन उसमें उग्रता कम अनुशासन ज्यादा नजर आया। लेकिन इस बार स्थिति दूसरी नजर आ रही है। यूपी में शीघ्र ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा भी जानती है कि बगैर जाट बिरादरी को साधे हुए पश्चिमी क्षेत्र में उसे मिशन 2017 पूरा करना आसान नहीं होगा। ऐसे में यह जाट आंदोलन भाजपा की राह में सबसे बड़ी बाधा के रूप में खड़ा हो गया है।
ये है पश्चिमी क्षेत्र के जाट बहुल जिले
पश्चिमी क्षेत्र में बागपत, मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, हाथरस, अमरोहा, मुरादाबाद, पीलीभीत, बरेली, संभल और फिरोजाबाद हैं।
रालोद नेता सक्रिय
रालोद नेता भी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। चौ. अजित सिंह ने भी जाट आरक्षण को समर्थन देकर कार्यकर्ताओं का उत्साह जहां बढ़ाया है, वहीं आंदोलन को पश्चिम में मजबूती भी दे दी है। अब देखना ये है कि भाजपा इससे कैसे पार पाती है।