जिस कार से विदेशी नागरिकों को सहारनपुर लाया गया था, उसका ड्राइवर गाजियाबाद जनपद में पकड़ा गया था। आतंकियों के बारे में सटीक सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव ने पुलिस टीम के साथ खाताखेड़ी में उस मकान को घेर लिया था, जिसमें आतंकियों ने विदेशी नागरिकों को बंधक बना रखा था।
रात के अंधेरे में आतंकियों ने पुलिस पर गोलियां बरसा दी थीं, जिसमें इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव और एक सिपाही शहीद हो गया था। कई आतंकी वहां से फरार हो गए थे, एक आरोपी को मार गिराने के बाद विदेशी नागरिकों को मुक्त करा लिया गया था। हालांकि इसके बाद मुजफ्फरनगर के गांव जौला से भी जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर मोहम्मद वारस गिरफ्तार किया गया था। बाद में कांधार विमान अपहरण कांड में मौलाना अजहर मसूद को छोड़ा गया था।
अब उस भवन में चल रही पुलिस चौकी
जिस मकान में आतंकियों ने विदेशी नागरिकों को कई दिन तक बंधक बनाकर रखा था, उसमें अब पुलिस चौकी खाताखेड़ी चल रही है। इन दिनों वहां पर एक उपनिरीक्षक और पांच सिपाहियों की तैनाती है। उस वक्त मकान में दो कमरे, एक गैलरी और बाहरी बैठक बनी थी।
आतंकियों ने तीनों विदेशी नागरिकों को पीछे की तरफ छोटे से कमरे में जंजीरों से बांधकर रखा था। 1994 में जब यह वारदात हुई थी, तो वहां इक्का दुक्का ही मकान थे, बाकी आसपास बाग था और प्लाटिंग हो चुकी थी।
दहशत में बीता था वक्त : मुनव्वर
खाताखेड़ी पुलिस चौकी के बगल में रहने वाले मुनव्वर बताते हैं कि जब यह घटना हुई थी, तब उनके माता पिता और भाई बहन घर में ही थे। आसपास में कुछ ही मकान थे। गोलियों की आवाज सुनकर दहशत पसर गई थी। लोग घरों में दुबक गए थे। बाद में बाहर आए, तो मकान की दीवारों पर गोलियों के निशान थे।
इसके बाद पुलिस ने उनके भाई और बहनोई से भी पूछताछ की थी। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस कालोनी का नाम शहीद ध्रुवलाल यादव की याद में शहीद नगर रखा गया था, लेकिन फिर बदलकर हयातनगर हो गया था।
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