शहर के लिए नासूर बन चुके जाम को लेकर ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह उदासीन है। प्रमुख चौराहों को होमगार्डों या फिर फर्जी पुलिस अफसरों के हवाले कर दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस का पूरा ध्यान चालान काटकर अपना टारगेट पूरा करना रह गया है। खाकी के सामने सिस्टम की इस बेबसी से लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है।
दिन में भयंकर जाम के समय आराम करने वाली पुलिस रात में उगाही करने में लगी हुई है। चौराहों पर टीआई, टीएसआई और टीएचसीपी को ई-चालान के अलावा अलग से रोजाना 20-20 चालान काटने का टारगेट है, जो हर हालत में काटना है। अपने अधिकारी का टारगेट पूरा करने के लिए ट्रैफिक सिपाही दिनभर सड़कों पर लगे रहते है। जिन्हें जाम से कोई लेना-देना नहीं है। यही वजह है कि होमगार्डों के हवाले ही चौराहे चल रहे है।
आदर्श चौराहा भी नहीं सुधार सके
शहर में सिर्फ एकमात्र कमिश्नर आवास चौराहे को आदर्श चौराहा बनाने की कवायद शुरू हुई थी। खुद कमिश्नर ने इस चौराहे को ठीक करने का प्लान बनाया था। इस चौराहे पर लाखों रुपये खर्च हुए। लेकिन स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। चौराहा होमगार्ड चलाते हैं, जिसके चलते वहां रोजाना हादसे होते है। सिस्टम जल्द नहीं सुधारा तो बड़ा हादसा भी हो सकता है। गलती होमगार्डों की नहीं है, क्योंकि उनको तो चौराहे चलाने की ट्रेनिंग ही नहीं दी गई। जबकि उस चौराहे पर एक टीएसआई, दो टीएचसीपी और चार ट्रैफिक सिपाहियों की तैनाती है। इसके बावजूद भी वहां पर दिन भर जाम लगा होता है।
चालान किसी का और भेज दिया किसको
ट्रैफिक पुलिस का ई-चालान प्लान भी दम तोड़ने लगा है। कभी एडवांस डेट में चालान काटा जाता है तो कभी दूसरे के नाम चालान घर पहुंच रहा है। रविवार शाम को कंकरखेड़ा के कृष्णा कॉलोनी निवासी सुधा गर्ग के घर ई-चालान पहुंचा। चालान में जो स्कूटी नंबर लिखा था, वह सुधा की नहीं है। लेकिन चालान सुधा के नाम से है। सुधा ने पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि स्कूटी किसी सुनील नाम के व्यक्ति की है। इसको लेकर सुधा परेशान है। ऐसा नहीं कि यह केवल एक व्यक्ति की शिकायत है। इस बारे में एसपी ट्रैफिक कार्यालय में जानकारी की गई तो पता चला कि रोजाना ऐसी कई शिकायतें आती हैं।