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CAA :भाजपा ने सराहा, विपक्ष ने बताया चुनावी हथकंडा, मौलाना अतहर काजमी ने मुसलमानों को लेकर कही ये बड़ी बात

Tue, 12 Mar 2024 11:44 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

देश में 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' (सीएए) के नियम लागू हो गए हैं। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसे लेकर मेरठ में अमर उजाल ने जनप्रतिनिधियों से उनकी राय जानी।
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अमित अग्रवाल, विधायक, डॉ. लक्ष्मीकांत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीएए लागू होने के साथ ही इसका विरोध भी मुखर हो गया है। मनसबिया अरबी कालेज के प्रवक्ता मौलाना अतहर काजमी कहते हैं कि देश में सीएए लागू करना भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा था। इसे लागू किया गया यह अच्छी बात है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि इसमें मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है।

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उन्होंने कहा कि कई ऐसे परिवार हैं जो सरहद पार रहते हैं और उनके पूर्वज हिंदुस्तान में दफ्न हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपनी गलती सुधार कर हिंदुस्तान में आकर रहना चाहते हैं। लेकिन अफसोस इस बात का है इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया है, जिससे वह इस कानून का लाभ नहीं ले सकते। इस कानून से मुस्लिमों को घबराने की जरूरत नहीं है। यह नागरिकता देने का कानून है, नागरिकता लेने का कानून नहीं है।

इस कानून से मुसलमानों को कोई एतराज नहीं है। शिकायत बस इतनी सी है कि यह कानून सारे नागरिकों पर लागू होगा सिर्फ मुसलमानों पर लागू नहीं होगा। यानी मुसलमान चाइना, बर्मा, श्रीलंका या बांग्लादेश से आते हैं और सारी शर्तें पूरी करते हैं तो भी उनको नागरिकता नहीं दी जाएगी। हमारा संविधान किसी से भेदभाव की इजाजत नहीं देता। जब दूसरे मजहब के लोगों को शर्तें पूरी करने पर नागरिकता दी जा सकती है तो मुसलमानों को देने में क्या हर्ज है?  -प्रोफेसर साजिदीन सिद्दीकी, शहर काजी 

यह भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव: फूंक-फूंककर कदम रख रही बसपा, मेरठ से कई दिग्गज लाइन में, अभी तय नहीं प्रत्याशी

हमारा संविधान जाति, धर्म और लिंग के आधार पर कानून बनाने की इजाजत नहीं देता। भले ही यह कानून मुसलमानों के लिए न हो फिर भी यह कानून मजहब के आधार पर है। इसलिए संविधान के खिलाफ है। इसे जल्दबाजी में चुनावी फायदे के लिए लागू किया जा रहा है। जबकि 2019 में जब यह कानून लोकसभा में लाया गया था उस समय ही काफी विरोध इस कानून का हुआ था। -हाजी शीराज रहमान, कोषाध्यक्ष, जमीअत उलेमा ए हिंद

सीएए अधिनियम को सरकार ने साढ़े चार साल लटकाकर रखा। चुनाव के समय अधिनियम लागू किया है। देश में सभी के लिए कानून एक समान होना चाहिए। इससे मुस्लिमों को अलग रखा गया है। केन्द्र सरकार चुनाव से पहले इसकी घोषणा वोटों के धुव्रीकरण करने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए की है। - जयपाल सिंह पाल, जिलाध्यक्ष बसपा।

दिसंबर 2019 में संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों को अधिसूचित करने में मोदी सरकार को चार साल और तीन महीने लग गए। सीएए के नियमों को अधिसूचित करने में लिया गया इतना समय प्रधानमंत्री के सफ़ेद झूठ की एक और झलक है। यह इलेक्टोरल बांड घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और सख़्ती के बाद हेडलाइन को मैनेज करने का प्रयास भी प्रतीत होता है। -अवनीश काजला, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस
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सीएए भाजपा सरकार का चुनावी स्टंट है। लोकसभा चुनाव आने वाले हैं, इसलिए इसे लागू किया जा रहा है। देश का नौजवान बेरोजगार है, कानून व्यवस्था चौपट है। किसान परेशान है। ऐसे में इस तरह के कानून लाना, जिसे लेकर बड़ा विरोध है, भाजपा इसके जरिये चुनावी लाभ लेना चाहती है।  -विपिन चौधरी, जिलाध्यक्ष, सपा
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