कंप्रेशन क्लॉथ
खिलाड़ी के शरीर की सुरक्षा के लिए
कीमत: 7,000 से 8,000 तक
खासियत : टी-शर्ट के अंदर इसे पहना जाता है। यह शरीर को मैदान के मौसम के अनुसार गर्म व ठंडा रखता है। कं प्रेशन तकनीक से यह बनाया जाता है। कंप्रेशन क्लॉथ का निर्माण विशेषकर न्यूजीलैंड में होता है, सभी नाचमीन खिलाड़ी न्यूजीलैंड से ही इसे मंगाते हैं।
जूते
तेज गति से दौड़ने में सहायक
कीमत: 15,000 से 20,000 तक
खासियत : खिलाड़ी को मैदान पर तेज गति से दौड़ना होता है, इसलिए जूतों की गुणवत्ता को विशेष ध्यान रखा जाता है। बल्लेबाज रबर के तलवे (रबर सोल) के जूतों का प्रयोग करता है, जबकि गेंदबाज चमड़े के तलवे (लेदर सोल) के जूतों और स्पाइक का प्रयोग करते हैं।
लैगगॉर्ड
बल्लेबाज पैरों की सुरक्षा के लिए लैगगॉर्ड पहनता है, जो घुटने तक सुरक्षा करते हैं।
कीमत: 4,500 वजन: 1600 ग्राम से 2 किलो
खासियत : लैगगॉर्ड खिलाड़ी के पैरों की सुरक्षा करता है, बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है इसलिए विशेष गुणवत्ता परक सामग्री से इसे बनाया जाता है। कोरियन पीयू (पॉली यूरिथीन) से लैगगार्ड बनते हैं। सॉफ्टनेस व आराम के लिए इसमें फाइबर, प्लास्टो व कॉटन भरा जाता है। 145 कंपोंनेंट को मिलाकर एक लैगगॉर्ड बनता है।
बल्लेबाज की तैयारी
हेलमेट
सिर की सुरक्षा के लिए
कीमत: 15,000
वजन: 800 से 900 ग्राम
खासियत : बल्लेबाज का मुख्य सुरक्षा कवच हेलमेट होता है। बल्लेबाजों के ये हेलमेट ब्रिटिश स्टैंडर्ड इंप्रूव होते हैं। हेलमेट में टाइटेनियम के ग्रिल लगे होते हैं। यह टाइटेनियम चाइना से मंगाया जाता है। टाइटेनियम में सख्त मजबूती होती है, गेंद लगने पर यह दबता और टूटता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने हेलमेट के सुरक्षा मानकों को और बढ़ाया है।
ग्लव्ज
हाथों की सुरक्षा के लिए
कीमत : 3,500
वजन : 600 ग्राम
खासियत : 120 कंपोनेंट को जोड़कर बल्लेबाज के दस्ताने तैयार होते हैं। दस्तानों में कटिंग फिंगर, प्लेन दस्तानों के अलावा तमाम डिजाइन आते हैं। खिलाड़ी सुविधानुसार दस्ताने पसंद करता है। दस्तानों में अंगुलियों में प्लॉस्टो जॉट्स, फाइबर भरा जाता है, ताकि खेलते वक्त अंगुलियों पर दबाव न आए और पसीना सूखता रहे। दस्ताने के पॉम (हथेली) के भाग को शीप लेदर और पिराड लेदर से दस्ताने तैयार किए जाते हैं। भारत में खिलाड़ी शीप लेदर से बने दस्तानों का प्रयोग करते हैं, जबकि विदेश में पिराड लेदर जो भेड़ और कॉफ से मिलकर बनता है उसका प्रयोग किया जाता है। पिराड लेदर इंग्लैंड से आयात करते हैं। दस्तानों की उम्र केवल 6 से 7 मैच की होती है। बड़े बल्लेबाज अपने साथ हमेशा 5 से 7 जोड़े दस्ताने रखता है।
एल्बोगॉर्ड
कोहनियों की सुरक्षा के लिए
कीमत: 15,00 ,
वजन : 100 ग्राम तक
खासियत : एल्बोगॉर्ड 4 से 5 कंपोनेंट को मिलाकर तैयार होते हैं। बल्लेबाज जिस हाथ से बैटिंग करता है, उसी हाथ में एल्बोगॉर्ड पहनता है। एल्बॉगार्ड प्लास्टोटाइड और चमड़े से मिलकर बनता है, जो खिलाड़ी की कोहनी को पूरी सुरक्षा देता है।
बैट
बैटिंग के लिए
कीमत: 40,000 से 50,000
वजन : 1100 से 1250 ग्राम
खासियत : इंग्लिश विलो लकड़ी से बने बैट का प्रयोग ही अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की सभी बड़ी क्रिकेट स्पर्धाओं में होता है। इंग्लिश विलो इंग्लैंड से पूरे विश्व में बैट निर्माताओं कंपनियों को निर्यात की जाती है। यह लकड़ी एक नेचुरल प्रोडक्ट है। बल्लेबाज अपनी पसंद के अनुसार बैट का चयन करता है। गेंद को बेहतरीन शॉट देने के लिए बल्लेबाज अपने बैट को स्ट्रोक देकर उसके फाइबर खुलवाता है, ताकि बैट की मारक क्षमता बढ़े और गेंद दूर तक जाए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड की बैट निर्माता कंपनी गन एंड मूर, मेरठ की एसजी, एसएस, एसएफ, बीडीएम, एचआरएस, एसएम प्रमुख बैट निर्माता कंपनियां हैं।
गेंद
कीमत: 10,000 , वजन : 155.9 से 160 ग्राम
खासियत : चमड़े से गेंद को तैयार किया जाता है। गेंद की सिलाई सबसे प्रमुख होती है। सिलाई के लिए जर्मनी से धागे मंगाए जाते हैं। जर्मन धागों से पूरी गेंद में छह परत सिलाई की जाती है। पूरी सिलाई हाथ से होती है। इसके अलावा गेंद में लगने वाला कॉर्क विशेष रूप से पुर्तगाल से आता है, जिसे आधार बनाकर गेंद तैयार होती है। ऑस्ट्रेलिया की कूकाबूरा प्रमुख गेंद निर्माता कंपनी है। इसके अलावा मेरठ की सभी बल्ला निर्माता कंपनियां गेंदे भी बनाती हैं। गेंद में सिलाई का प्रमुख काम है जितनी मजबूत और अच्छी सिलाई होगी गेंद हवा में उतनी रफ्तार लेगी।
कैप
बल्लेबाज के अलावा गेंदबाज भी मैदान पर धूप से बचने के लिए कैप का प्रयोग करते हैं।
कीमत: 1,000
खासियत: टोपियां पसीने को सोखने का काम करती हैं। पसीने को सोखकर सिर को आराम देने के लिए टोपियाें में अंदर लाइनिंग लगी होती है। सर्दियों के लिए बैगी कैप जो वूलेन होती है और सर्दियों के लिए कैनवास कैप का इस्तेमाल होता है।
सनग्लासेस
खासियत: धूप में लगातार मैच खेलने के कारण गेंदबाज अमूमन सनग्लासेस का प्रयोग करते हैं। मनपसंद कंपनी के उच्च गुणवत्ता वाले चश्मे पहनते हैं। अमूमन इनकी कीमत 15 हजार रुपये से अधिक होती है।
नी कैप
खासियत: घुटने की सुरक्षा के लिए खिलाड़ी नी कैप का प्रयोग करते हैं। मनचाहे डिजायन में खिलाड़ी नी कैप लेते हैं।
खासियत : गेंदबाज, बल्लेबाज, फिल्डर सभी किटबैग का प्रयोग करते हैं। किटबैग खिलाड़ी की सबसे जरूरी एसेसरी है। जिसमें वो बल्ला, गेंद, कपड़ों से लेकर अपनी जरूरत का सारा सामान रखता है। समय के साथ कंपनियां किटबैग के डिजायन व रंगों को और आकर्षक बनाती जा रही हैं। अब खिलाड़ी अपने बल्ले की तरह किटबैग की खूबसूरती, मजबूती, वजन हर चीज पर पूरा ध्यान देता है। किटबैग जितना बड़ा, आकर्षक और वजन मे ंहल्का लेकिन मजबूत है उतना ही बेहतर माना जाता है। पहले केवल हाथ से उठाने वाले किटबैग आते थे, लेकिन अब ट्रॉली, एयरबैग और पिट्ठू स्टाइल के भी किटबैग हैं। लाल, पीले रंगों के अलावा प्रिंटेड, थ्रीडी प्रिंट के भी किट बैग कंपनियां बना रही हैं इनकी काफी मांग भी है।
किट बैग
कीमत: 10,000 तक 50,000
वजन : 7 से 8 किलो, लंबाई 40 इंच, ऊंचाई 18 इंच लगभग
समय से लेते हैं सामान
एक खिलाड़ी जब आईपीएल खेलने के लिए मैदान पर उतरता है तो अपनी किट की तैयारी लगभग एक साल पहले से शुरू कर देता है, ताकि अपने बैट से वो अभ्यास कर ले। दूसरी एसेसरीज भी खेल से पहले सही समय पर उसके पास हों।
- अनिल सरीन, निदेशक स्टेनफोर्ड क्रिकेट, एसएफ
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