केस -1
लालकुर्ती क्षेत्र में बसी झुग्गी-झोपड़ियों में करीब 200 बच्चे रहते हैं। यहां पर सरकार की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी। अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। निजी संस्थाएं बच्चों को पढ़ाने का प्रयास करती हैं। लेकिन बच्चों का प्रवेश किसी स्कूल में नहीं कराया गया।
केस -2
दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम बस्ती में तीन सौ से ज्यादा बच्चे रहते हैं। इनका भी किसी स्कूल में प्रवेश नहीं है। यहां निजी संस्थाओं ने बच्चों को कलम थमाकर साक्षरता की ओर कदम रखा है। यहां भी सरकारी योजनाओं का असर नहीं दिखाई दिया।
केस -3
शास्त्रीनगर स्थित मलिन बस्तियों में परिजन बच्चों को कूड़ा बीनने भेज देते हैं। शिक्षा के लिए जागरूक करने वाले जिम्मेदार लोग आंख मूंदे बैठे हैं। साक्षरता का नामोनिशान यहां भी देखने को नहीं मिला। कुछ निजी संस्थाएं जरूर काम कर रही हैं।
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वर्ष 2011 में साक्षरता दर
कुल - 21,41,488
साक्षर महिलाएं - 8,86,968
साक्षर पुरुष - 12,54,520
इसलिए मनाते हैं साक्षरता दिवस
यूनेस्को ने पहली बार 1965 में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की घोषणा इटली में की। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।
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हमारी टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ रही है। स्कूल चलो अभियान लगातार चलाया जा रहा है। तमाम बच्चों का दाखिला भी कराया गया है।
- योगेंद्र सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी