कौन नहीं जानता कि सुधार गृह में किशोरों को कैसी ट्रेनिंग दी जाती है। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने इसको बखूबी देखा है। सूरजकुंड स्थित संप्रेक्षण गृह में निरुद्ध किशोर सिपाही समेत चार लोगों की हत्या कर चुके हैं। हालत ऐसे थे कि रोजाना बवाल होना तय था। कई बार पुलिस अधिकारी तक पिटे। उसके बाद ही लखनऊ से एक्शन लेकर इस संप्रेक्षण गृह को जिला जिला परिसर में शिफ्ट किया गया।
तब थे किशोर, अब कुख्यात
सन 2010 में परतापुर के अछरौंडा गांव निवासी सोनू और मोनू, कसेरू बक्सर निवासी कपिल, कोतवाली निवासी नदीम, लिसाड़ी गेट से जावेद सुधार गृह में थे। वहां से आने के बाद यह कुख्यात बने। मोनू और नदीम पर 50-50 हजार का इनाम है। अन्य बदमाश जेल में हैं। इससे पहले मुकीम काला, सुनील राठी, अजय जडे़जा, योगेश काला, सलमान, अमित भूरा समेत कई अपराधी जेल में हैं, जिन्होंने किशोरावस्था से क्राइम शुरू किया।
मोहरा बनाते हैं कुख्यात
अधिकांश कुख्यात किशोरों को मोहरा बनकर अपराध कराते हैं। कई बदमाशों को पुलिस जेल भेज चुकी है, जोकि पूर्व में किशोर सुधार गृह में निरुद्ध रह चुके थे। कई अपराधियों के केस अभी सुधार गृह में चल रहे हैं, जो बड़ी जेल से तारीख पर लाए जाते हैं। -मंजिल सैनी दहल, एसएसपी
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