...एक से 10 कर्मचारियों वाली इकाइयों को अतिरिक्त कागजी कार्रवाई से मुक्त करने की मांग
... 30 से अधिक कर्मचारियों पर ही विस्तृत श्रम और कारखाना संबंधी नियम लागू करने का सुझाव
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ( पीमा ) ने केंद्र सरकार से सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए श्रम कानूनों के अनुपालन की अलग और सरल व्यवस्था बनाने की मांग की है। पीमा अध्यक्ष निपन जैन ने कहा कि छोटे उद्योगों की तुलना बड़े उद्योगों से करना व्यावहारिक नहीं है। बड़े उद्योगों में मानव संसाधन, कानूनी और अनुपालन के लिए अलग टीमें होती हैं। छोटे उद्योग सीमित संसाधनों में काम करते हैं।
निपुन जैन ने कहा कि एक से 10 कर्मचारियों तक की सूक्ष्म और लघु इकाइयों को अतिरिक्त श्रम संबंधी कागजी कार्रवाई से लगभग पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए। 10 से 30 कर्मचारियों तक की इकाइयों के लिए सरल व्यवस्था लागू हो। इस श्रेणी में अलग अलग रजिस्टर, विवरणी, नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र समेत भारी कागजी प्रक्रिया के बजाय केवल उपस्थिति रजिस्टर और सरल ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था पर्याप्त होनी चाहिए। 30 से अधिक कर्मचारियों पर ही विस्तृत कारखाना संबंधी नियम, रजिस्टर, विवरणी, नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, बोनस, भविष्य निधि और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने से छोटे उद्योगों पर नियोक्ता अंशदान और अनुपालन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। यह व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हुई है। छोटे उद्योगों के लिए भविष्य निधि की अनिवार्यता 30 से अधिक कर्मचारियों पर किए जाने की जरूरत है।
पीमा के सचिव नितिन कपूर ने कहा कि 30 कर्मचारियों तक की इकाइयों में छोटी प्रक्रियागत गलती पर भारी जुर्माना लगाने के बजाय पहली बार नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। जब तक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन, दुर्घटना या जानबूझकर कानून तोड़ने का मामला न हो तब तक दंडात्मक कार्रवाई से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं में सुधार का अवसर देने और मामलों के निपटारे की व्यवस्थाएं हैं। जिनका छोटे उद्योगों को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए।
निपुन जैन ने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार की रीढ़ हैं। उद्यमियों को रजिस्टर, विवरणी और निरीक्षण की जटिलताओं में उलझाने के बजाय उत्पादन, रोजगार और कारोबार बढ़ाने पर ध्यान देने का अवसर दिया जाना चाहिए।