सवाल: चीन के विरोध से क्या वैश्विक बाजार में भारत एक नई शक्ति बनकर उभरेगा?
जवाब: कोरोना के कारण चीन पर लोगों का संदेह बड़ा है। विकसित देशों ने अपनी इकाइयां चीन से हटाकर दूसरे देशों में ले जाने का मन बना लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मांग बढ़ रही है। इन देशों से भारत के संबंध भी मजबूत है। इसका हमें लाभ मिलेगा। आईआईए इस पर निगाह रखे हुए हैं। विदेश मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय एवं प्रदेश सरकार के साथ लगातार इस पर संवाद हो रहा है। इकाइयां आना शुरू हो गई हैं।
चमड़ा उद्योग की इकाइयां आगरा में स्थापित होना शुरू हो चुकी हैं। भारत सरकार इस संबंध में प्रयासरत है। हमसे फीडबैक भी ले रही हैं। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक की इंडस्ट्री आने की संभावना है। विकसित देशों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का लाभ मिलेगा। मंत्रालय से इसके संकेत मिल चुके हैं।
दवाओं का वेस्ट प्रोडक्ट, वेज मेटल्स के कच्चे माल, मशीनरी जो अभी भारत में चीन से आती थी इन सब में अब हमारी निर्भरता चीन से कम होगी। तो देश में ही इस क्षेत्र में काम बढ़ेगा। प्रदेश व भारत सरकार ने ऐसी इकाइयों के लिए कुछ नीति बनाने पर काम शुरू कर दिया है। 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए हमने स्टडी ग्रुप बनाया है जिसमें हम प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। अब इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना आवश्यक है जिस पर सरकारों को काम करना होगा।
सवाल: रक्षा क्षेत्र के उत्पाद निर्माण में कोई बदलाव होगा?
जवाब: डिफेंस साइट को बढ़ाने के लिए कर्नाटक और यूपी बड़ा हब है। यूपी में डिफेंस एक्सपो हो भी चुका है। अब सरकारों की मंशा यही है कि डिफेंस की सारी मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो। इसमें भी एमएसएमई बड़ी भूमिका निभाएगी। इसका लाभ इंडस्ट्री को जरूर मिलेगा।