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चीन के खिलाफ वैश्विक औद्योगिक शक्ति बनेगा भारत, आईआईए के राष्ट्रीय अध्य्क्ष की अमर उजाला से खास बातचीत  

Tue, 26 May 2020 03:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • तालाबंदी खुली, लेकिन आसान नहीं होगी उद्योग संचालन की राह।  
  • देश में 6934 करोड़ एमएसएमई है।
  • इसमें 14 प्रतिशत सर्वाधिक लगभग 90 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां केवल उत्तर प्रदेश में हैं।
  • इसमें निर्माण क्षेत्र में 9 लाख इकाइयां हैं।
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आईआईए (इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन) के राष्ट्रीय अध्य्क्ष पंकज गुप्ता - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण से सम्पूर्ण विश्व का चीन से भरोसा उठ गया है। तमाम विकसित देश अब भारत में औद्योगिक विकास की नई शुरुआत करने की ताक में हैं। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन जैसी महाशक्तियों की निगाहें अब भारत पर हैं जहां वे अपने उद्योगों को गति दे सकें। कुशल कामगार और सरकार की नई नीतियों से भारत और उत्तर प्रदेश को इसका पूरा लाभ मिलेगा। 

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सरकार ने 'इज ऑफ डूइंग' का कदम बढ़ाकर इसकी तैयारी शुरू कर दी है। 60 दिन की तालाबंदी ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है। भारी नुकसान को झेलते उद्यमियों के सामने कामगारों के पलायन, कच्चे माल की ठप हुई आपूर्ति, मांग में कमी, बकाया भुगतान और पूंजी संकट जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। 

फैक्टरी खुलने की अनुमति और सरकार के कर्ज बांटने के राहत पैकेज से औद्योगिक इकाइयां गति नहीं पकड़ सकेंगी। अर्थव्यवस्था की पटरी पर उद्योगों को पुनः रफ्तार भरने के लिए जीएसटी रिफण्ड व स्थाई खर्चों में छूट की दरकार है। तालाबंदी से उद्योगों के सामने क्या मुश्किलें है, इससे वे कैसे उबरें, क्या हो सरकार की भूमिका, इन्हीं बिंदुओं पर आईआईए (इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन) के राष्ट्रीय अध्य्क्ष पंकज गुप्ता से विशेष बातचीत:-

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सवाल: उद्योग चलाने की अनुमति मिली है, अब उद्यमियों के सामने क्या चुनौतियां हैं ? 
जवाब:
कच्चा माल नहीं तो काम कैसे शुरू करेंगे, कच्चा माल एक बड़ी समस्या है। महीनों से मशीने, मोटर बंद हैं उन्हें दोबारा चलाने के लिए इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर की जरूरत है, उन्हें प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है यह भी समस्या है। उद्यमी के पास पूंजी नहीं हैं बिना पूंजी के काम लंबे समय तक नहीं चल पाएगा। फिर बाजार अभी अनिश्चितता की ओर है इसलिए जो माल बनेगा भी वो बिकेगा इसमें संदेह है। बाजार में मांग नहीं है।

सवाल: क्या सरकारी राहत पैकेज उद्यमी, उद्योग के लिए फलदायी है ?
जवाब:
 सरकार ने जो घोषणाएं की हैं वे नुकसान को पूरा करने के लिए नहीं है। सरकार ने तीन लाख करोड़ का राहत पैकेज दिया है। उसका त्वरित लाभ उद्यमी, उद्योग को नहीं मिलेगा। अभी उद्यमी को पूंजी की जरूरत है। सरकार बिना गारंटी के ऋण दे रही है, लेकिन अभी उद्यमी को पूंजी की आवश्यकता है। यह पूंजी उसे जीएसटी रिफंड को वेवऑफ से मिलती। सरकार, पीएसयू व कॉर्पोरेट पर लंबित भुगतानों से पैसा दे।

इससे तुरंत लिक्विडिटी बढ़ती। बैंक भी घोषणाओं के अनुसार अभी ऋण देने में वक्त लगा रहे हैं। एक साल के लिए बिना ब्याज पर ऋण की बात है इससे लाभ भविष्य में काम बढ़ाने में मिलेगा। अभी ऐसा ऋण मिलना चाहिए था जो फौरन कैश क्रंच की स्थिति को दूर करता। एमएसएमई की तमाम कार्मिक ईपीएफ में कवर नहीं होते। 97 फीसद उद्योग सूक्षम होती हैं जो ईपीएफ का लाभ नहीं ले पाएंगी। एनपीए इंडस्ट्री के लिए अच्छा कदम है पैकेज में है।    

सवाल: आईआईए की आगामी योजना क्या है?
जवाब:
आईआईए का पहला काम लेबर को वापस लाना है। हम अन्य जिलों व राज्य सरकारों से वार्ता की तैयारी में हैं ताकि उनसे अनुग्रह कर सके कि वह लेबर को वापस भेजें साथ ही निजी स्तर पर भी उद्यमियों द्वारा श्रमिकों को वापस बुलाने का काम शुरू किया गया है। कुशल कामगारों को सही रोजगार के लिए आईआईए अपनी वेबसाइट पर युवाओं के पंजीयन की सुविधा शुरू कर रहा है।

वेबसाइट कंपनी और युवाओं के बीच पुल का काम करेगी, यह सुविधा निशुल्क होगी। युवा यहां पंजीयन कर अपने लिए जॉब सर्च कर सकेंगे। कंपनी जिसे युवाओं की आवश्यकता है। वह युवाओं की तलाश इसी साइट से कर सकेगी, यह एक निशुल्क सुविधा होगी। हमने मार्केट, लेबर, प्रोडक्ट, पूंजी की जानकारी अपने पोर्टल पर देना शुरू किया है। ताकि हम मार्केट की समस्या दूर कर सकें।  
 
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सवाल: चीन के विरोध से क्या वैश्विक बाजार में भारत एक नई शक्ति बनकर उभरेगा?
जवाब:
कोरोना के कारण चीन पर लोगों का संदेह बड़ा है। विकसित देशों ने अपनी इकाइयां चीन से हटाकर दूसरे देशों में ले जाने का मन बना लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मांग बढ़ रही है। इन देशों से भारत के संबंध भी मजबूत है। इसका हमें लाभ मिलेगा। आईआईए इस पर निगाह रखे हुए हैं। विदेश मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय एवं प्रदेश सरकार के साथ लगातार इस पर संवाद हो रहा है। इकाइयां आना शुरू हो गई हैं।

चमड़ा उद्योग की इकाइयां आगरा में स्थापित होना शुरू हो चुकी हैं। भारत सरकार इस संबंध में प्रयासरत है। हमसे फीडबैक भी ले रही हैं। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक की इंडस्ट्री आने की संभावना है। विकसित देशों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का लाभ मिलेगा। मंत्रालय से इसके संकेत मिल चुके हैं।

दवाओं का वेस्ट प्रोडक्ट, वेज मेटल्स के कच्चे माल, मशीनरी जो अभी भारत में चीन से आती थी इन सब में अब हमारी निर्भरता चीन से कम होगी। तो देश में ही इस क्षेत्र में काम बढ़ेगा। प्रदेश व भारत सरकार ने ऐसी इकाइयों के लिए कुछ नीति बनाने पर काम शुरू कर दिया है। 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए हमने स्टडी ग्रुप बनाया है जिसमें हम प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। अब इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना आवश्यक है जिस पर सरकारों को काम करना होगा।  

सवाल: रक्षा क्षेत्र के उत्पाद निर्माण में कोई बदलाव होगा?
जवाब:
डिफेंस साइट को बढ़ाने के लिए कर्नाटक और यूपी बड़ा हब है। यूपी में डिफेंस एक्सपो हो भी चुका है। अब सरकारों की मंशा यही है कि डिफेंस की सारी मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो। इसमें भी एमएसएमई बड़ी भूमिका निभाएगी। इसका लाभ इंडस्ट्री को जरूर मिलेगा। 
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