शहर का खूनी नाला बृहस्पतिवार को फिर एक मासूम की जिंदगी लील गया। मासूम अपनी मां के साथ बाजार में खरीददारी के लिए आया था। घटना के बाद लोगों ने नगर निगम के खिलाफ हंगामा किया। बाद में पुलिस को बिना सूचित किये शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
जाकिर कालोनी निवासी इशाक मलिक के मकान में गुलशन अपने परिवार के साथ किराये पर रहता है। वह पुताई का काम करता है। बृहस्पतिवार सुबह वह काम पर निकल गया। दोपहर करीब 12 बजे उसकी पत्नी रेशमा अपने चार साल के मासूम बेटे सोनू को लेकर बाजार खरीददारी के लिए निकल गई। फतेहउल्लापुर रोड पर लक्खीपुरा के सामने एक दुकान पर वह खरीददारी करने लगी। इसी दौरान सोनू खेलता हुआ नाले में गिर गया। खरीदारी करती रेशमा की नजर पड़ी, तो सोनू गायब था। वह परेशान होकर उसे इधर-उधर तलाशने लगी। आसपास के लोग भी बच्चे को ढूंढने में जुट गये। मस्जिद से भी एलान करा दिया गया। लोग कांच के पुल तक मासूम को ढूंढ आये, लेकिन पता नहीं चल सका। करीब दो घंटे तक वह नहीं मिला, तो लोगों ने नाले में उसे तलाशना शुरू किया। पांच फीट गहरे नाले में बांस की मदद से बच्चे को तलाशा गया। 50 मीटर की दूरी पर मासूम को नाले से बरामद कर लिया गया। लोग उसे निकालकर डाक्टर के यहां पहुंचे। डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत पर रेशमा बिलख-बिलखकर रोने लगी। परिजनों में कोहराम मच गया। कुछ ही देर में गुलशन भी आ गया। लोगों ने बच्चे की मौत के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराते हुए हंगामा कर दिया। बाद में बिना पुलिस को सूचित किये परिजन शव को ले गए और सुपुर्द-ए-खाक कर दिया। उधर, लिसाड़ीगेट इंस्पेक्टर ने मामले से अनभिज्ञता जताई है। परिजनों ने बताया कि सोनू पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था और सबका दुलारा था।