बता दें कि प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर एक ई-पोर्टल बनाया है। पोर्टल पर पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों से ई-कंटेंट अपलोड कराए जा रहे हैं। इसका मकसद है कि प्रदेश में कहीं से भी छात्र-छात्राएं अच्छा ई-कंटेंट पढ़ सकें। छह माह से इस पर काम चल रहा है। विवि ने सभी कॉलेजों से चार अक्तूबर तक ई-कंटेंट भेजने को कहा था। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने इसको लेकर सभी प्राचार्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की थी।
कैंपस के शिक्षक कर रहे बेहतर
डिग्री कॉलेज और कैंपस के शिक्षक कितना कार्य कर रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कैंपस के करीब 100 शिक्षकों ने ही 486 ई-कंटेंट अपलोड कराए हैं। इनमें सेल्फ फाइनेंस विषयों के शिक्षक भी शामिल हैं।
परीक्षा में लगी है ड्यूटी
बहुत से शिक्षकों का कहना है कि उनकी ड्यूटी परीक्षा में लगी है, ऐसे में वह कैसे ई-कंटेंट तैयार करें लेकिन सवाल यह है कि परीक्षाएं तो एक सितंबर से शुरू हुई ऐसे में छह महीने पहले क्यों कंटेंट तैयार नहीं किए गए।
कॉलजों की स्थिति ठीक नहीं
किस कॉलेज से कितने शिक्षकों ने कितने-कितने ई-कंटेंट भेजे हैं, इसकी सभी प्राचार्यों से जानकारी मांगी जा रही है। कॉलेजों की यह स्थिति ठीक नहीं है। -डॉ. राजीव कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी मेरठ