मेरठ। कक्षा पांच और आठ की वार्षिक परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों को पास होने के लिए दो अतिरिक्त अवसर दिए जाएंगे। यदि इन दो प्रयासों के बाद भी विद्यार्थी फेल होता है तो उसे उसी कक्षा में पढ़ना होगा। केंद्र सरकार की ओर से बदली व्यवस्था के तहत फेल होने वाले विद्यार्थियों को दो माह के भीतर दोबारा परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाएगा। अगर इसमें भी असफल रहते हैं, तो उन्हें फेल कर दिया जाएगा और दोबारा उसी कक्षा में पढ़ना पड़ेगा। नए शिक्षा सत्र के लिए विद्यालयों की ओर से ये दिशा-निर्देश फिर से जारी किए गए हैं।
बता दें कि वर्ष 2023 तक आठवीं कक्षा तक बच्चों को फेल नहीं करने का प्रावधान था। साल 2010-11 से 8वीं कक्षा तक परीक्षा में फेल होने के प्रावधान पर रोक लगा दी गई थी। मतलब यह कि बच्चों के फेल होने के बावजूद अगली क्लास में प्रमोट कर दिया जाता था, लेकिन इससे शिक्षा स्तर में धीरे-धीरे गिरावट आने लगी। इसका असर आगे की परीक्षाओं पर पड़ने लगा, मगर गत वर्ष ही इस नियम में बदलाव कर दिया गया था।
हालांकि आरटीई एक्ट के तहत इस बात पर जोर दिया जाता है कि किसी भी बच्चे को स्कूल से निकाला नहीं जाएगा। प्रधानाचार्यों को फेल बच्चों की लिस्ट बनाए रखने, सीखने में अंतराल की पहचान करने और इन कक्षाओं में पास बच्चों के लिए विशेष इनपुट के प्रावधानों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने की आवश्यकता होती है।
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वैसे तो यह नियम-2024 में ही लागू कर दिया गया था, लेकिन अधिकांश अभिभावक इस बारे में अभी तक समझ नहीं पा रहे हैं और वह लगातार स्कूलों पर दबाव बनाते हैं कि उनके बच्चों को दूसरी कक्षा में प्रमोट कर दिया जाए। सभी को नियम को समझने की जरूरत है। इसलिए नए सिर से दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। - राहुल केसरवानी, सचिव, सहोदय।