आरक्षण से टूटे सपने तो अपनों पर दांव लगाने की तैयारी
हस्तिनापुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का आरक्षण जारी होते ही गांव की गलियों में हलचल तेज हो गई है। वहीं, इस आरक्षण से कई दिग्गजों के समीकरण बिगड़ गए हैं, जिससे अब आरक्षण के टूटे सपनों के बाद अब अपने चहेतों पर दांव लगाने की तैयारी है।
जिले की ग्राम पंचायतों में से अब ऐसी कोई ग्राम पंचायत नहीं होगी, जहां चुनावी हलचल तेज नहीं हो रही होगी। इस बार आरक्षण में हुए बदलाव के बाद चुनाव लड़ने का मन बनाने वाले लोगों ने अभी हार नहीं मानी है। अब वह इस तरह का माहौल बनाने में जुट गए हैं कि चाहे उन्हें चुनाव लड़ने का इस बार मौका भले ही नहीं मिला हो, परंतु ग्राम पंचायत की सीट उनके पसंदीदा व्यक्ति के कब्जे में ही होगी जिससे उनका वर्चस्व कायम रहेगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ग्राम प्रधानपद को लेकर काफी अहम माना जाता है। चुनाव में प्रधान पद के दावेदारों को आरक्षण उनके मन मुताबिक नहीं मिला। कहीं सीट महिला तो कहीं अन्य जाति वर्ग के लिए आरक्षित की गई। चुनाव से पहले ही मात खाए दावेदारों ने अब परिवार की महिलाओं या अन्य वर्ग के अपने खास लोगों को मोहरा बनाकर चुनावी समर में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। आरक्षण जारी होने के बाद कोई अपनी पत्नी, बहन या मां को चुनाव लड़ाने की तैयारी में है तो कोई अपने खास भरोसेमंद को आगे करके गांव व क्षेत्र में दबदबा बरकरार रखने की जद्दोजहद में जुट गया है।
आपत्ति पर है उम्मीद कायम
आरक्षण के चलते चुनाव से पहले ही मैदान से बाहर हुए दावेदारों की अब आखिरी उम्मीद आपत्ति पर टिकी है, लेकिन पंचायत राज विभाग के सूत्राें के अनुसार आपत्ति भले ही आ रही हों, लेकिन जारी हुई सूची में बदलाव की बहुत कम संभावना है।
कागजात तैयार कराने लगे दावेदार
आरक्षण सूची जारी होने के बाद दावेदारों ने नामांकन के समय जरूरी अभिलेखों में नो ड्यूज, जाति, मूल निवास आदि प्रपत्र तैयार कराने शुरू कर दिए हैं।