खरखौदा। खरखौदा नगर पंचायत को एक वर्ष पहले आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिल चुका है। हालांकि कस्बे में सबसे बड़ी समस्या तालाबों पर अतिक्रमण, जल निकासी, डंपिंग ग्राउंड, महिला महाविद्यालय के लिए रास्ता समेत कई मूल सुविधाओं से वंछित हैं। विकास के लिए करोड़ों रुपये आने के बाद भी कस्बे के लोग बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
करीब 16 हजार की आबादी वाले कस्बा खरखौदा को वर्ष 1956 में नगर पंचायत का दर्जा मिला था। कस्बे में राजकीय महिला महाविद्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय समेत दो इंटर कॉलेज भी हैं। कस्बे में नगर पंचायत की ओर से स्ट्रीट लाइटें, पिंक शौचालय समेत दो सुलभ शौचालय, पेयजल के लिए दो वाटर टैंक, कस्बे में वाटर कूलर समेत कई सुविधाओं से लैस है। नगर पंचायत को सफाई के लिए जिले में पहला स्थान मिल चुका है। इसके चलते पंडित दीनदयाल आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिला है। जिसके लिए खरखौदा नगर पंचायत को शासन से विकास के लिए करोड़ों रुपये मिले हैं। इसके बाद भी खरखौदा नगर पंचायत विकास में पिछड़ रही है।
जल निकासी की व्यवस्था नहीं
कस्बे में आठ तालाब हैं। कई वर्षों से इन तालाबों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। कई तालाबों की वर्षों से सफाई नहीं हुई है। तालाबों में कूड़ा एवं सिल्ट जमा है। इसके चलते कई तालाब ओवरफ्लो हो रहे हैं। कस्बे में जल निकासी की उपयुक्त व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी बरसात के दौरान मुख्य बाजार समेत कई मोहल्ले जलमग्न हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त बरसात का पानी कस्बे के मुख्य श्मशान घाट के रास्ते पर भी भर जाता है। अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते वक्त लोगों को इसी से गुजरना पड़ता है। कस्बे का पानी कस्बा समेत गांव लालपुर के किसानों के खेतों में भर जाता है। पिछले करीब बीस वर्ष से कस्बे के लोग जलभराव से निजात की मांग कर रहे हैं।
श्मशान घाट एवं कब्रिस्तान में जलभराव
विकास के लिए करोड़ों रुपये का बजट आने के बाद भी कस्बे के मुख्य श्मशान घाट का न तो सौंदर्यीकरण हुआ और न ही सफाई है। कस्बे का गंदा पानी अब भी श्मशान घाट एवं कब्रिस्तान में भरा है।
कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्रांउड नहीं
कस्बे में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कूड़ा निकलता है। नगर पंचायत के समीप डंपिंग ग्रांउड नहीं है। अभी तक केवल जगह ही चिह्नित की गई है। कस्बे का कूड़ा मोहिउद्दीनपुर रोड स्थित मॉडल स्कूल के बराबर में खुले में डाला जा रहा है। जहां बदबू के चलते बच्चों का पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा है।
चार वर्ष बाद भी नहीं बना रास्ता
कस्बे में बने राजकीय महिला महाविद्यालय में जुलाई 2016 से पढ़ाई शुरू हो गई। इसके बावजूद महाविद्यालय को जाने वाले मुख्य मार्ग के लिए छात्राओं को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जहां सबसे पहले रेलवे द्वारा बनाए गए अंडरपास में जलभराव एवं दूसरा एक किलोमीटर का कच्चा रास्ता। कॉलेज प्रशासन पिछले चार वर्षों से जनप्रतिनिधियों समेत, नगर पंचायत एवं प्रशासन से भी गुहार लगा चुके हैं। जिसके चलते चार सत्र में कॉलेज की सीट पूरी नहीं भर पाती हैं। रिक्त पड़ी सीटों पर प्रवेश के लिए कॉलेज प्रशासन को ही जनसंपर्क करना पड़ता है।
पैठ के लिए उपयुक्त स्थान नहीं
कस्बे के मुख्य बाजार में बुधवार को साप्ताहिक बाजार भी लगता है। कस्बे के आसपास के करीब दो दर्जन गांवों के लोग यहां खरीदारी करने आते हैं। जिससे बुधवार को बाजार का मुख्य रास्ता बंद हो जाता है। लोगों की मांग के बाद भी नगर पंचायत स्तर से साप्ताहिक बाजार के लिए कोई जगह चिह्नित नहीं है।
नहीं लगे सीसीटीवी
कस्बे में रोड पर ही चार बैंक शाखाएं, पांच एटीएम हैं। कई बार चोरी होने पर कस्बा के व्यापारियों समेत कस्बा के लोगों ने कुछ मुख्य स्थानों पर सीसीटी कैमरे की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद कस्बे में कैमरे नहीं लगाए गए हैं।
गोआश्रय स्थल में नहीं हो सका निर्माण शुरू
कस्बे में पहले अस्थायी गोआश्रय स्थल खोला गया था। जिसमें सैकड़ों आवारा गोवंशों को रखा गया था। नगर पंचायत ने पचड़े से बचने के लिए अस्थायी गोआश्रय स्थल को ही समाप्त कर दिया। अब कस्बे में सैकड़ों आवारा गोवंश खेतों में फसलें उजाड़ रहे हैं। वहीं, तत्कालीन एसडीएम ने स्थायी गोआश्रय स्थल के लिए जगह चिह्नित कर दी थी, लेकिन आज तक भी उसमें कोई निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
नगर पंचायत चेयरमैन रमेश चंद का कहना है कि कस्बे की मुख्य समस्या जल निकासी की है। इसके लिए नगर पंचायत का बजट कम है। इसके लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता है। शासन तथा जनप्रतिनिधियों से इसकी मांग की जा चुकी है। वहीं, जल्द ही डंपिंग ग्राउंड पर भी निर्माण शुरू हो जाएगा।