बिना सरकारी गाड़ी के पूरा महीना बीत चुका है। बुढ़ाना में तो अधीनस्थ ऑफिसर की गाड़ी में जांच आदि के लिए चले जाते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय आने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस ऑफिसर की शालीनता यह है कि यह रोडवेज बस से ही मुख्यालय पर आ रहे हैं। अर्दली और अंगरक्षक के साथ रोडवेज बस स्टैंड और बस में जो भी देखता है, वह दंग रह जाता हैं।
कहते हैं ऐसे सरल स्वभाव के अफसर कहां देखने को मिलते हैं। तहसील कर्मी उनकी भल मनसाहत के कायल हैं। इस संबंध में नितिन गौर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
गाड़ी तो अलॉट है: डीएम
एसडीएम की गाड़ी को लेकर डीएम राजीव शर्मा का कहना है कि उन्हें गाड़ी तो अलॉट है। डीएम ने यह तो बता दिया कि गाड़ी अलॉट है पर यह नहीं बताया कि मिलेगी कब।
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