आत्महत्या जैसे विचार भी आ रहे
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि महिलाओं का उपचार किया जा रहा है। अधिकतर महिलाओं का ध्यान लगाने में दिक्कत महसूस होती है। दुखी रहना, रोना, घबराना, तनाव, चिंता और सोने की समस्या है। महिलाओं में आत्महत्या का विचार तक आ रहा है। ऐसी महिलाओं को ठीक करने के लिए परिवार और दोस्तों के सहयोग की भी जरूरत पड़ती है।
जीवन के प्रति रुझान हो जाता है कम
जिला अस्पताल की काउंसलर डॉ. विभा नागर ने बताया कि ये महिलाएं किसी भी कार्य को मेनेज करने में असहज महसूस करती हैं। धीरे-धीरे यह इनकी आदत में शुमार हो गया और फिर वह डिप्रेशन में चली गईं। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने के कारण इन महिलाओं में जीवन के प्रति रुझान भी कम हो जाता है।