आरएसएस के मंच पर मोहन भागवत के अलावा महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा अवधेशानंद गिरि महाराज और जैन मुनि विहर्ष सागर जी, प्रभात गुरुकुल आश्रम के कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद को विराजमान किया गया। इसके अलावा मोहन भागवत ने साफ कहा कि समाज के हर वर्ग को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जोड़ने पर ही बात बनेगी। खास तौर पर सामाजिक समरसता की बात कही। बोले कि हमारा खान पान, दर्शन, जीवन शैली अलग-अलग हो सकती है पर हम सब हिंदू हैं। उन्होंने हिंदू को परिभाषित भी किया। कहा कि जो दूसरों की पीड़ा समझे वही हिंदू है। जो निर्बल का सहारा बने वहीं हिन्दू है। जो भारत माता को माने वही हिंदू है। कहा कि कुछ इस तरह तन, मन, धन के साथ संघ से जुड़ो कि निडर बन जाओ। योग्य बन जाओ। कहा कि हमारे देश में कुछ लोग यह जानते तो हैं कि वे हिंदू हैं पर कहते नहीं है। यदि वे भी कहें तो पूरे विश्व में हमारी शक्ति और बढ़ जाए।
उदाहरण, कहानियों से भरा जोश
मोहन भागवत ने विभिन्न उदाहरण, पंचतंत्र की लघु कहानियों के जरिए स्वयंसेवकों में जोश भरा। कहा जो शक्तिशाली है, उसे प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं। वह स्वत: ही दिख जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि पवन पुत्र हनुमान को उनकी शक्ति याद दिलानी पड़ी थी। उसके याद आते ही वे महाबली हो गए थे। एक छलांग में समंदर पार कर गए और लंका को जला डाला। उसी तरह से सभी युवाओं को अपनी शक्ति को याद करना होगा। शेर की कहानी सुनाकर बताया कि शक्ति को बताने की जरूरत नहीं होती।
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