फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी हैं हम अभियान: डॉ. रघुवीर शरण मित्र को भजन की तरह सुहाते थे आजादी के नारे

Fri, 21 Aug 2020 04:01 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

देह-देह में बसा रहूं मैं, रहमत हो या हीरा
सबके गीत मुझे आते हैं, गिरधर हो या मीरा
मेरा कृष्ण देश है मेरा, मुरली वंशी प्यारे
मुझे भजन की तरह सुहाते आजादी के नारे
विज्ञापन
महात्मा गांधी जी के साथ रघुवीर शरण मित्र। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फिरंगियों के खिलाफ एक युवक जब स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेते हुए यह पंक्तियां सुनाता था तो बड़े-बड़े क्रांतिकारी भी चकित हो जाते। हर कोई आवाज आने की दिशा में देखता तो कुर्ते-पाजामे में एक नौजवान नजर आता है। खेलने की उम्र में ये नवयुवक आंदोलनों और सभाओं में भाग लेता। इसके मुंह से शब्द नहीं नारों के अंगारे बरसते। शब्दरूपी अंगारों का आदि-अंत सिर्फ और सिर्फ आजादी होता था।

विज्ञापन


नारों में भजन लिखने वाला यह नौजवान था रघुवीर शरण मित्र। कालांतर में रघुवीर शरण मित्र हिंदी साहित्य के तेजमयी सूरज बनकर चमके और इनके शब्द सागर से साहित्य के वो रत्न निकले, जिन्हें देश के हर कोने में पढ़ा गया। ये नवयुवक आज भारतीय हिंदी साहित्य में पद्मश्री डॉ. रघुवीर शरण मित्र के नाम से विख्यात हैं। मेरठ की माटी से पद्मश्री डॉ. मित्र हिंदी साहित्य का वह कोहिनूर हैं, जिनका दामन मां शारदा ने ज्ञान के समग्र खजाने से भर दिया था। श्रेष्ठ कवि, बाल रचनाकार, उपन्यासकार के रूप में डॉ. मित्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे। आजादी की लड़ाई के दौरान वह तीन बार जेल गए। 

नौ सितंबर, 1919 को सदर कैंट में वैश्य परिवार में जन्मे डॉ. मित्र की प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही उन पर वीणावादिनी की कृपा हुई कि उन्होंने शिक्षा के साथ साहित्य का दामन थाम लिया। 1994 में शब्द संसार का यह कोहिनूर, आकाश के असंख्य तारों का साथी बनकर अमर हो गया। 
विज्ञापन


रचनाओं ने हर वर्ग में मचाई हलचल
सीसीएसयू में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन लोहनी कहते हैं कि डॉ. मित्र के लेखन की गहराई उनके आभामंडल की छायाप्रति प्रतीत होती है। उन्होंने उपन्यास, हिंदी कविता, बाल साहित्य से लेकर युवाओं में हलचल मचाने वाला साहित्य रचा। उनके शब्द और वाक्य विन्यास बताते हैं कि डॉ. मित्र साहित्य की अंगुली थामकर चल रहे थे।

यह भी पढ़ें: 'हिंदी हैं हम' अभियान: हिंदी में खुलें नए अवसर तो युवाओं में बढ़ेगा आकर्षण

विज्ञापन

हर कृति से एक नई यात्रा 
हिंदी साहित्यकारों पर पीएचडी कर चुके डॉ. रामगोपाल भारतीय कहते हैं डॉ. मित्र की 100 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। रामायण की तरह उन्होंने जैनायन लिखा था। गांधीजी के चरित्र पर जननायक महाकाव्य, निर्वासित सीता की मर्म व्यथा पर भूमिजा खंड काव्य रचा। डॉ. हरिवंश राय बच्चन, पंडित जवाहर लाल नेहरू व महात्मा गांधी के साथ कवि सम्मेलनों में शामिल होने वाले डॉ. मित्र हर दिल अजीज थे।

26 जनवरी, 1983 को पद्मश्री  से किया गया था सम्मान
आजादी के लिए जेल की सींखचों में रहे। पथ की दुर्गमताओं को रचनाओं से भरने वाले कवि डॉ. मित्र को 26 जनवरी, 1983 को पद्मश्री से नवाजा गया था। उन्हें प्रदेश सरकार ने भी सम्मानित किया। डीलिट की मानद उपाधि से नवाजे गए। पहली कृति 1944 में परतंत्र बसंत पंचमी आई। वीरायन, मानवेंद्र, ढाल तलवार भी इनकी प्रमुख कृतियां हैं।

पिछले साल डाक विभाग ने जारी किया था विशेष लिफाफा
2019 में डॉ. मित्र के जन्मशती वर्ष पर डाक विभाग ने विशेष लिफाफा जारी किया, जिसमें उनकी जीवन यात्रा का ब्योरा दर्ज है। इनके बेस्ट सेलर उपन्यास आग और पानी व अन्य को राजस्थान, मेरठ, जोधपुर में बीए के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। इस उपन्यास के अंश धारावाहिक चाणक्य में भी लिए गए। मेरठ में इन्होंने भारतोदय नाम से प्रकाशन केंद्र प्रारंभ किया था।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें