हर कृति से एक नई यात्रा
हिंदी साहित्यकारों पर पीएचडी कर चुके डॉ. रामगोपाल भारतीय कहते हैं डॉ. मित्र की 100 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। रामायण की तरह उन्होंने जैनायन लिखा था। गांधीजी के चरित्र पर जननायक महाकाव्य, निर्वासित सीता की मर्म व्यथा पर भूमिजा खंड काव्य रचा। डॉ. हरिवंश राय बच्चन, पंडित जवाहर लाल नेहरू व महात्मा गांधी के साथ कवि सम्मेलनों में शामिल होने वाले डॉ. मित्र हर दिल अजीज थे।
26 जनवरी, 1983 को पद्मश्री से किया गया था सम्मान
आजादी के लिए जेल की सींखचों में रहे। पथ की दुर्गमताओं को रचनाओं से भरने वाले कवि डॉ. मित्र को 26 जनवरी, 1983 को पद्मश्री से नवाजा गया था। उन्हें प्रदेश सरकार ने भी सम्मानित किया। डीलिट की मानद उपाधि से नवाजे गए। पहली कृति 1944 में परतंत्र बसंत पंचमी आई। वीरायन, मानवेंद्र, ढाल तलवार भी इनकी प्रमुख कृतियां हैं।
पिछले साल डाक विभाग ने जारी किया था विशेष लिफाफा
2019 में डॉ. मित्र के जन्मशती वर्ष पर डाक विभाग ने विशेष लिफाफा जारी किया, जिसमें उनकी जीवन यात्रा का ब्योरा दर्ज है। इनके बेस्ट सेलर उपन्यास आग और पानी व अन्य को राजस्थान, मेरठ, जोधपुर में बीए के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। इस उपन्यास के अंश धारावाहिक चाणक्य में भी लिए गए। मेरठ में इन्होंने भारतोदय नाम से प्रकाशन केंद्र प्रारंभ किया था।
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