सोमवार सुबह ही ग्रामीणों ने कमिश्नरी में धरना शुरू कर दिया। स्थानीय पुलिस के अलावा हापुड़ से एएसपी और सीओ भी कमिश्नरी पहुंच गए। उधर, सपा नेता अतुल प्रधान भी समर्थकों के साथ पहुंच गए। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने कहा कि इंस्पेक्टर पिलखुवा को यहीं बुला दो, उल्टा लटका देंगे। एक निर्दोष को कैसे पीटा आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज नहीं होगा तो धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने धौलाना के विधायक असलम चौधरी से भी मोबाइल पर बात की। शाम चार बजे भीड़ जबरन कमिश्नरी में घुस गई। पुलिस ने स्थिति को संभाला। रात को पुलिस शव को पोस्टमार्टम के बाद हापुड़ ले जाने की तैयारी कर रही थी।
आपबीती सुनाते बिलख पड़ा राहुल
प्रदीप डासना में सिक्योरिटी कंपनी में नौकरी करता था। दो बेटे राहुल (13) और नितिन (9) हैं। राहुल ने कमिश्नरी पर पुलिस अधिकारियों को बताया कि मेरे पापा को पुलिस ने पहले तो मेरे सामने पीटा। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं रोने लगा और हाथ जोड़े। लेकिन पुलिस ने मुझे डराया। उसके बाद चौकी से मुझे बाहर बैठा दिया। अंदर से मेरे पापा चिल्ला रहे थे और पुलिस उन्हें पीट रही थी। किशोर ने बताया कि मुझे भी कई थप्पड़ मारे। प्रदीप के छोटे भाई कुलदीप ने भी मारपीट का आरोप लगाया।
यह बोले ईएमओ
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि प्रदीप तोमर को रविवार रात करीब साढ़े 12 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उसका ईसीजी कराया गया। ब्लड प्रेशर चेक किया गया, मगर वह मृत पाया गया। पुलिसवाले उसके परिजनों के साथ उसे लेकर आए थे। परिजन उसका पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर रहे थे। बाद में समझाने पर वह राजी हुए।
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