लचर कार्यप्रणाली है जिम्मेदार
लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के कारण मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कस पाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है, सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है। हालांकि, भारतीय दंड संहिता में मिलावटखोरों पर कड़ी सजा का प्रावधान है, लेकिन मिलावट से संबंधित 90 फीसदी मामले प्रशासनिक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिस कारण वह न्यायालय की कार्रवाई से बच जाते हैं।
यह वसूला गया जुर्माना
साल जुर्माना
2023 चार करोड़, 40 लाख, 10 हजार रुपये
2022 एक करोड़, 72 लाख, 70 हजार रुपये
2021 43 लाख 65 हजार रुपये
2020 41 लाख 33 हजार 500 रुपये
2019 70 लाख 88 हजार रुपये
2018 60 लाख 73 हजार रुपये
विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं। खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे जाते हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है। - शिव कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, एफएसडीए
मिलावटी खाने से किडनी और पेट संबंधी रोग हो सकते हैं। ऐसे खाने से दूर रहें। मिलावटी तेल और घी का दिल पर तेजी से असर होता है। धमनियों में चिकनाई जम जाती है। हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। -डॉ. तनुराज सिरोही, फिजिशियन
जो नमूने असुरक्षित पाए जाते हैं उनमें एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इनमें 6 माह से लेकर आजीवन कारावास तक सजा का प्रावधान है। तीन लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है। -दीपक सिंह, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए