बच्चों से पूछने पर पता चला कि प्रधानाध्यापिका नियमित रूप से पढ़ाने नहीं आती थीं। शिक्षिकाओं ने भी बताया कि वह कभी-कभी विद्यालय पहुंचकर उपस्थिति पंजिका के खाली कॉलमों में हस्ताक्षर कर चली जाती थीं। इस दौरान विद्यालय के शौचालयों पर ताले लगे मिले और बायोटॉयलेट में सफाई का अभाव पाया गया। छत पर पौधे उगे मिले, जिससे भवन में जल रिसाव और लिंटर को नुकसान की आशंका जताई गई।
बीएसए ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि विद्यालय को हर वर्ष कंपोजिट ग्रांट, स्पोर्ट्स ग्रांट, ईको क्लब और टीएलएम मद में धनराशि उपलब्ध कराई जाती रही लेकिन इन मदों का उपयोग दिखाई नहीं दिया। अधिकांश शिक्षिकाओं का जवाब संतोषजनक रहा लेकिन प्रधानाध्यापिका का स्पष्टीकरण साक्ष्यहीन और अस्वीकार्य माना गया।
कार में बैठकर उपिस्थति पंजिका पर हस्ताक्षर के आरोप, बीईओ भी तलब
प्रधानाध्यापिका पूनम रानी पर पिछले तीन वर्षों में कभी-कभार ही स्कूल आने और कार में बैठकर उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर करने के आरोपों के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) आशा चौधरी ने खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुरेंद्र गौड़ से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
इस प्रकरण में बीईओ ने अपना व्यक्तिगत स्पष्टीकरण और निरीक्षण का विवरण नहीं भेजा। चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया तो विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शिक्षा निदेशक (बेसिक) लखनऊ को भेज दी जाएगी।