फलावदा। बीती रात साहित्यिक संस्था अंजुमन इर्तिका ए अदब उर्दू की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया गोष्ठी की अध्यक्षता मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम और संचालन प्रख्यात शायर अनवार उल हक शादा ने किया। काव्य गोष्ठी का आगाज हाफिज महफूज उर रहमान माहिर की नाते पाक से हुआ। काव्य गोष्ठी में उपस्थित श्रोताओं ने कवियों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं को खूब सराहा।
बुजुर्ग शायर अनवार उल हक शादा ने कहा कि मैं बदनसीब हूं गफलत शिआर हूं लोगों, फलक से भेजी गई थी किताब मेरे लिए। मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम ने कहा कि रंज ओ गम ने कर दिया पत्थर सिफत इंसान को, कोई आमादा नहीं है मुस्कुराने के लिए। श्रोताओं को गुदगुदाते हुए निसार रहकर फरीदी ने कहा कि जब से बेटे की आई है छम्मो, बाप से बदजबान बोलता है। मां से बोले है तू तड़ाक के साथ, सास को अम्मा जान बोलता है।
पूर्व चेयरमैन अब्दुस समद साहिर ने कहा कि कहा ठहरूं कहां सुस्ताऊं लोगो, ये नफरत की डगर है और मैं हूं। डॉ. सलीम खान ने पढ़ा कि अमीर ए शहर के ये फैसले हैं, हमें मुजरिम बनाया जा रहा है। हाफिज महफूजुर रहमान माहिर ने पढ़ा कि मेरे घर पर आ गया रंजो अलम का काफिला, मुंतजिर बैठा था। कब से मुस्कुराने के लिए। देकर जमाल शम्मा को अल्लाह ने जफर पैदा निसार होने को परवाना कर दिया। रागिब अली जहर आदि ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। संस्था के संरक्षक अनवार उल हक शादां ने सभी कवियों व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।