हस्तिनापुर पर्यटन विभाग को सही से हिंदी का ज्ञान नहीं है यदि यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा। महाभारतकालीन नगरी में प्राचीन द्रौपदी घाट मंदिर पर लगे पर्यटन विभाग के बोर्ड पर लिखे नामों में कई गलतियां हैं। इसके बाद भी कई साल पहले लगे इन बोर्डों पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पर्यटन नगरी में सरकार विकास के दावे करे, लेकिन सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी पर कभी भी खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यदि आप द्रौपदी मंदिर भ्रमण करने जा रहे हैं तो यहां पर लगे दिशा सूचक बोर्ड का भरोसा न करें। इन पर लिखे गलत नामों पर मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम इकाई मेरठ भी ध्यान नहीं दे रही है।
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द्रौपदी मंदिर का जीर्णोद्धार कई साल पूर्व पर्यटन विभाग द्वारा कराया गया था। यह कार्य पूर्ण कराने के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम इकाई मेरठ को जिम्मेदारी दी गई थी।
लाखों रुपयों से काम तो करा दिया गया, लेकिन दिशा सूचक बोर्ड और मंदिर पर लगे बोर्ड में लिखे गए नामों (द्रौपदी, सौंदर्यीकरण, इकाई) आदि में कई गलतियां हैं। इन्हें देखकर तो ऐसा लगता है कि शायद विभागीय अधिकारियों को हिंदी का ज्ञान नहीं है। इस संबंध में पर्यटन अधिकारी अंजू चौधरी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।
बता दें कि महाभारतकालीन इतिहास को समेटे हस्तिनापुर नगरी देश में प्रसिद्ध हैं यहां कर्ण मंदिर, द्रोपदी मंदिर समेत कई प्राचीन मंदिर आज भी मौजूद हैं। यहां वह कुआं भी हैं जहां कहा जाता है कि द्रोपदी यहां स्नान किया करती थीं। हस्तिनापुर में कई बार पुरातत्व विभाग को महाभारतकालीन बर्तन, चूड़ियां, कलश आदि भी खोदाई के दौरान प्राप्त हुए हैं।
महाभारत का इतिहास जानने के लिए यहां दूर दूर से पर्यटक पहुंचते हैं। नव वर्ष के मौके पर शुक्रवार को पर्यटकों की काफी भीड़ रही, लेकिन हस्तिनापुर पर्यटक विभाग पर्यटन के लिहाज से यहां की व्यवस्था और सौंदर्य पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।