हाशिमपुरा कांड के आरोपी आठ पीएसीकर्मियों को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इसे लेकर हाशिमपुरा के लोगों में नाराजगी है, मगर उनका कहना है कि वे इंसाफ की लड़ाई जारी रखेंगे।
सांप्रदायिक दंगों के दौरान 22 मई 1987 को पीएसी कर्मी मेरठ के हाशिमपुरा के बेकसूर लोगों को गाड़ी में भरकर ले गए थे। मुरादनगर गंगनहर के पास ले जाकर 42 लोगों को गोलियों से भून दिया था। हाशिमपुरा कांड के आठ दोषियों को जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवारों की इंसाफ की उम्मीद फिर धूमिल हो गई है। उन्होंने कहा कि आज भी वह दिन याद करके आंखे भर आती हैं। जख्म हरे हो जाते हैं। आरोपियों को कोर्ट से राहत मिलने के बाद आगे की पैरवी जरूर करेंगे लेकिन दो पीढ़ियों के पैर पैरवी कर-करके दुख चुके हैं।
37 साल हो गए, नहीं भरे आज भी जख्म
हाशिमपुरा के रहने वाले कमरुद्दीन पुत्र जमालुद्दीन की जान चली गई थी। मां जैतून बेगम और भाई शमसुद्दीन ने बताया कि घटना से दो साल पहले कमरुद्दीन की शादी हुई थी। परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन 1987 में मौत के बाद घर की सारी खुशियां चली गईं। पिता जमालुद्दीन ने कोर्ट में केस लड़ा। पूरी पैरवी की लेकिन दो साल पहले पिता की भी मौत हो गई। आज भी हमारे जख्म हरे हैं।
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मृतक सिराज की बहन नसीम बानो।
- फोटो : अमर उजाला
अब ऊपर वाले पर ही भरोसा
हाशिमपुरा निवासी सिराज अहमद पुत्र शब्बीर अहमद की भी पीएसी की गोली लगने से मौत हुई थी। बहन नसीम बानो ने बताया कि चार बहनों में अकेला भाई सिराज था। उस समय घर का चिराग बुझ गया था। अब तो केवल ऊपर वाले पर ही भरोसा है। सिराज की शादी होने वाली थी, उससे पहले पीएसी की गोली लगने से मौत हो गई।
हाजी मुस्तकीम का बेटा जमीर।
- फोटो : अमर उजाला
मैं बच्चा था, बेगुनाह पिता की लाश पड़ी थी
हाशिमपुरा के रहने वाले हाजी मुस्तकीम भी इस घटना के शिकार हो गए थे। उनकी भी मौत हो गई थी। मुस्तकीम के बेटे जमीर ने बताया कि जिस समय पिता के साथ घटना हुई, उस समय वह छह साल का था। उसको तो कुछ याद नहीं। पिता की शक्ल भी याद नहीं है। चाचा फईमुद्दीन की भी मौत हुई थी। उनका परिवार दिल्ली में रहता है। हमारी मांग है कि दोषियों को जमानत देने की बजाय सख्त सजा हो, जो दुनिया के लिए नजीर बने।
दो बेटों की गई थी जान, चारपाई पर लेटी मां मांग रही इंसाफ
हाशिमपुरा निवासी मोहम्मद कय्यूम, मोहम्मद अय्यूब की भी हत्या हुई थी। बिस्तर पर लेटी मां बुशरा ने बताया कि अब उसका एक बेटा शकील है, जो उसके साथ रहता है। पुलिस कस्टडी में हत्या की गई है। ऐसे में जब पुलिसकर्मियों ने हत्या की है तो उनको जमानत क्यों दी गई है।