इनको क्या मालूम क्या होता है बाल दिवस। बस इंतजार है तो एक ग्राहक का
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। 14 नवंबर की तारीख आती है तो याद आ जाता है बाल दिवस। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री बच्चों से बहुत प्यार करते थे, लेकिन आज देहात की गलियां हों या फिर शहर की सड़कें। बच्चे मजदूरी करते हुए जरूर मिलेंगे। इन बच्चों को देखकर यही याद आता है कि काश इनके भी कोई चाचा नेहरू होते।
शारदा रोड पर एक बच्चा मूंगफली बेच रहा था। यह बच्चा इसी इंतजार में है कि कोई उससे मूंगफली खरीद ले तो शाम को कुछ पैसे लेकर वह घर पहुंच जाएगा। जो भी आता उसे देखकर वह यही सोचता कि उसकी मूंगफली कितनी बिकेंगी। करीब 13 साल का ऐसा ही अन्य बच्चा ठेले पर सब्जी बेच रहा था। उसने बताया कि वह गरीब है। मम्मी पापा मेहनत करने भेज देते हैं। बागपत अड्डे के पास एक बच्चा बाइक पर मैकेनिक का काम सीख रहा है। कभी बाइक पर कपड़ा मारता तो कभी बाइक रिपेयगिं के लिए मदद करता। दिल्ली रोड पर भी कई जगह ऐसे ही बच्चे मजदूरी करते हुए दिखाई दिए।
पढ़ें : बाल दिवस पर बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी को लिखी चिट्ठी