16 बरस से नहीं थम रहे आंसू
27 साल के सुनील ढाका के घर में सबकुछ अच्छा चल रहा था। सुनील को बेटा हुआ तो घर में खुशियां दोगुनी हो गईं। इसी बीच सुनील के पिता राजपाल सिंह का देहांत हो गया। परिवार अभी इसी गम से उबर भी नहीं पाया था कि सुनील की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
बड़े भाई दिल्ली पुलिस में कार्यरत अनिल ढाका बताते हैं कि पलभर में सबकुछ बदल गया। सुनील परिवार की जिम्मेदारी संभालने लगा था, लेकिन इस घटना ने परिवार का सुख-चैन ही छीन लिया। सुनील का नाम लेते ही उनकी माता जगवती देवी की आंखें नम हो जाती हैं। गला भर्रा जाता है।
बार-बार बस इतना ही कहती हैं कि 16 साल से कोई दिन ऐसा नहीं बीता जब मेरे बेटे की याद न आई हो। वे कहती हैं कि हमें कानून पर पूरा भरोसा है। जिस तरह से मेरे बच्चे की जान ली गई, उसी तरह से कानून हत्यारोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दे। भाभी बबीता कहती हैं कि सुनील उनके बच्चे की तरह था। हमें इंसाफ चाहिए। भाई सुनील ढाका कहते हैं कि हमें कानून हत्यारोपियों को उनके किए की सजा देगा।
पुनीत गिरी के माता पिता
- फोटो : अमर उजाला
सुनील ढाका (फाइल फोटो)
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सुधीर उज्जवल (फाइल फोटो)
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पुनीत गिरी (फाइल फोटो)
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पुलिस के आरोप पत्र के मुताबिक झगड़े के बाद इजलाल ने अपने भाइयों के साथ मिलकर तीनों को पकड़ लिया। पहले तीनों को पाइपों से बुरी तरह से पीटा गया। गोलियां मारी गईं। फिर सबके गले काटे गए। शवों को पानी से धोकर कार की डिग्गी में रखकर लालबत्ती लगी कई गाड़ियों के बीच आधी रात को नदी किनारे ले जाकर शवों को फेंक दिया गया। पुलिस ने इस मामले में हाजी इजलाल, उसके भाई अफजाल व परवेज समेत दस आरोपियों को कोर्ट में पेश किया।
कुल 14 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई है। इनमें हाजी इजलाल कुरैशी, परवेज और अफजाल पुत्रगण स्वर्गीय इकबाल, मेहराज पुत्र मेहताब, इसरार पुत्र रशीद, कल्लू उर्फ कलुआ पुत्र हाजी अमानत, इजहार, मुन्नू ड्राइवर उर्फ देवेंद्र आहूजा पुत्र विजय, वसीम पुत्र नसरुद्दीन, रिजवान पुत्र स्वर्गीय उस्मान और बदरुद्दीन पुत्र इलाहीबख्श, शम्मी और माजिद के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मुकदमे में बहस पूरी हो गई है। आज इस मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मुकदमे का स्टेट्स मांगा है।