शम्मी की गिरफ्तारी काफी बाद में होने के कारण उसका ट्रायल फिलहाल कोर्ट में चल रहा है। जबकि इजलाल और शीबा समेत 10 दोषियों को अदालत उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुना चुकी है।
गुदड़ी बाजार के तिहरे हत्याकांड में न्यायालय ने पांच अगस्त को दो फैसले सुनाए थे। इजलाल कुरैशी, अफजाल, महराज, कल्लू, इजहार, मन्नू ड्राइवर उर्फ देवेंद्र आहूजा, वसीम, रिजवान, बदरुद्दीन के मामले में 173 पेज और शीबा के मामले में अदालत ने 58 पेज का निर्णय दिया था। कोर्ट ने अपने निर्णय में माना है कि शीबा के उकसाने पर इजलाल और उसके साथियों ने 22 मई 2008 को सुधीर उज्ज्वल, सुनील ढाका और पुनीत गिरि की हत्या की थी। सभी दस आरोपियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी और जुर्माना भी लगाया था।
न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-2 की अदालत में आरोपी शम्मी के मुकदमे की सुनवाई चल रही है। बुधवार को इस मामले में मृतकों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. कृष्ण कुमार की गवाही होनी थी। लेकिन डॉ. कृष्ण कुमार गवाही देने के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रमोद कुमार त्यागी एडवोकेट ने बताया कि अब न्यायालय ने गवाही के लिए बृहस्पतिवार की तिथि नियत की है।
ये था मामला
23 मई 2008 की दोपहर बागपत और मेरठ जिले की सीमा पर बालैनी में हिंडन नदी के किनारे तीन युवकों के शव कार में पड़े मिले थे। इनकी पहचान मेरठ निवासी 27 वर्षीय सुनील ढाका निवासी ढिकौली बागपत, 22 वर्षीय पुनीत गिरि निवासी खटकी परीक्षितगढ़ और 23 वर्षीय सुधीर उज्ज्वल पुत्र सुरेश कुमार निवासी सिरसलगढ़ बिनौली बागपत के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि 22 मई की रात तीनों की हत्या कोतवाली के गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल कुरैशी ने अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर की थी। इजलाल की दोस्त शीबा सिरोही को हत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। हत्याकांड के दो आरोपी इसरार और माजिद की मौत हो चुकी है। एक अन्य को नाबालिग बताए जाने के चलते हाईकोर्ट में उसकी अपील लंबित है।