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पुलिस महकमे को सरकारी गनर कर रहे दागदार, नहीं साबित हो पाए वफादार 

Thu, 04 Oct 2018 03:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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सुरक्षा का ठेका लेने वाले कुछ सरकारी गनर जिंदगी के वफादार साबित नहीं हो पाए। कहीं लंबे समय से एक ही जगह सुरक्षा में लगे गनर्स के सामने आपराधिक घटनाएं हुईं तो कहीं घटना के दौरान ही गनर गैरहाजिर पाया गया। कोई गनर हमलावरों के आगे नहीं टिक पाया तो किसी गनर की लापरवाही से चश्मदीद गवाह का खून बह गया...

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विधायक आवास पर हमला
महानगर में पिछले दिनों कई बड़ी घटनाएं सरकारी गनरों की लापरवाही के चलते हुईं। सुरक्षा कर्मियों की कई मामलों में लापरवाही सामने आने पर पुलिस अधिकारियों ने ऐसे सुरक्षा गार्डों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए इनकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी। हाल ही में भाजपा विधायक संगीत सोम के कैंट आवास पर हमले में यूपी पुलिस के सुरक्षाकर्मियों की बड़ी लापरवाही भी सामने आई।

हमले के दौरान कोई सुरक्षाकर्मी गायब था तो कोई आधुनिक हथियार होते हुए भी हमलावरों को जवाब नहीं दे पाया। चश्मदीद गवाह बने सुरक्षाकर्मी ने खुद स्वीकार किया कि हमलावर को देखकर वह घबरा गया था। जबकि वह एक बार गोली चला देता तो हमलावर वहां से भाग नहीं पाते।

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गनर थाने लौटे, महिला की हत्या
सरूरपुर के गांव हसनपुर रजापुर निवासी चेतन की हत्या में उसकी मां सावित्री, भाई मितन और रवि चश्मदीद गवाह बने। विरोधी पक्ष ने गवाही देने पर खून बहाने का एलान कर रखा था। मां-बेटों ने एसएसपी से मिलकर जान का खतरा जताया था। थाने से एक गनर पुलिस अफसरों ने सुरक्षा में दे दिया। सिपाही ने पथरी का दर्द बताया और थाने चला गया। जब तक दूसरा सिपाही आया नहीं था। इस बीच विरोधियों ने सावित्री की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। भाई के साथ अब मां की हत्या में मितन और रवि चश्मदीद गवाह हैं।

शराब पीकर सोता रहा गनर
हस्तिनापुर के अलीपुर मोरना गांव में दो साल पहले दंपति की हत्या हुई थी। माता-पिता की हत्या के बाद से उसके बेटे जोगेंद्र को सुरक्षा मुहैया कराई थी। जोगेंद्र की सुरक्षा में गनर लगा था। इसके बावजूद 15 सितंबर को हमलावरों ने घर पर हमला बोल दिया। वारदात में जोगेंद्र का नौकर राजा मारा गया। जबकि गनर शराब पीकर सोता रहा। हालांकि बाद में राजा की हत्या में जोगेंद्र व उसके भाई की भूमिका सामने आई। लेकिन सवाल यहां यह खड़ा हुआ कि सरकारी गनर पहले से सचेत क्यों नहीं हुआ।

कमिश्नर आवास की गारद से गायब
इससे बड़ी लापरवाही क्या हो सकती है कि मंडलायुक्त की गारद में तैनात सिपाही रात में गायब हो जाएं। दिसंबर 2017 में तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने कमिश्नर आवास पर रात में औचक पहुंचकर गारद की जांच की थी। लेकिन दोनों सिपाही गायब थे। बाद में एसएसपी ने दोनों को सस्पेंड कर विभागीय जांच बैठाई थी।
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पेशी के दौरान भगा चुके कुख्यात
26 जून 2015 को कुख्यात तांत्रिक नजाकत अली को दो सिपाही कोर्ट में पेशी पर लाए थे। सिपाहियों की लापरवाही से कुख्यात कस्टडी से फरार हो गया। बाद में अफसरों ने जांच कराई तो पता चला कि कुख्यात कचहरी से नहीं बल्कि सिपाही उसे लालच में फूलबाग कालोनी में एक मकान में लेकर गए थे। दो साल से नजाकत मोस्ट वांटेड बना है।

पुलिस ने गनरों का खंगाला रिकॉर्ड, जांच में सब फंस रहे
जिला पंचायत चुनाव के समय भाजपा से जिला पंचायत सदस्य मीनाक्षी भराला के काफिले पर कंकरखेड़ा में शाम के समय बाइक सवार लोगों ने फायरिंग कर दी थी। हमलावर फरार हो गये। लेकिन गनर ने जवाबी फायरिंग नहीं की। छह माह पहले किठौर विधायक सत्यवीर त्यागी पर हमला हुआ था। लेकिन उसमें भी गनर की लापरवाही सामने आयी। 

बर्खास्तगी की लटकी तलवार
एसएसपी अखिलेश कुमार का कहना है कि लंबे समय से गनर एक जगह ही ड्यूटी करता है। सेटिंग कर अपनी अवधि बढ़वा लेता है। इसकी जानकारी की जा रही है। गनर की लापरवाही के चलते आपराधिक घटना होगी तो उसकी बर्खास्तगी की रिपोर्ट भेजी जाएगी। गनरों की जांच कराई जा रही है। लंबे समय से टिके गनरों को हटाया जाएगा। 

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