14वें वित्त में नहीं किए काम तो सरकार ने
15वें वित्त में निगम को नहीं दी फूटी कोड़ी
मेरठ। नगर निगम प्रशासन शहर के विकास को लेकर कितना गंभीर है, इसकी सच्चाई सामने आ गई है। निगम प्रशासन की तिजोरी में 14वें वित्त के 100 करोड़ रुपये जमा है, लेकिन वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकारी खजाना खर्च नहीं किया गया, जिस कारण अब सरकार ने 15वें वित्त से नगर निगम को मिलने वाली करोड़ों रुपये की धनराशि की पहली किश्त रोक दी है।
भारत सरकार महानगर की डैमेज व्यवस्था सुधारने यानी नालों का निर्माण कराने, शहर की सफाई व सीवर सफाई के लिए संसाधन खरीदने और जलापूर्ति के संसाधनों को बढ़ाने के साथ-साथ कुछ विकास कार्य कराने के लिए प्रतिवर्ष नगर निगम को करोड़ों रुपये जारी करती है। वर्ष 2019-20 में सरकार ने 14वें वित्त से नगर निगम को लगभग 80 करोड़ रुपये जारी किए। 13वें वित्त से भी नगर निगम के पास लगभग 20 करोड़ रुपये बकाया चला आ रहा है। कुल मिलाकर नगर निगम के पास इस समय 100 करोड़ रुपये हैं। अगर नगर निगम प्रशासन चाहता तो 100 करोड़ रुपये से शहर का काफी विकास हो सकता था।
100 करोड़ में से 32 करोड रुपये के प्रस्ताव तो तैयार कर लिए गए हैं, लेकिन बैठक नहीं की गई। भारत सरकार ने सभी नगर निगम व नगर पालिकाओं को 15वें वित्त की धनराशि जारी कर दी है, लेकिन इस सूची में मेरठ नगर निगम का नाम नहीं है। नगर निगम प्रशासन समय से सभी कार्यों की टेंडर प्रक्रिया करके रिपोर्ट सरकार को भेज देता तो 15वे वित्त में सरकार नगर निगम को 30 से 40 करोड़ रुपये जारी कर देती।
नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी संतोष शर्मा का कहना है कि 100 करोड रुपये खर्च नहीं हो पाए हैं, जिस कारण सरकार ने 15वें वित्त से नगर निगम को राशि जारी नहीं की है।