सहारनपुर में ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के लिए बकरा बाजार में जमकर बकरों की खरीदारी हो रही है। सबसे ज्यादा मांग तोतापरी बकरे की है। इसके अलावा अन्य नस्लों के डेढ़ से पांच लाख रुपये तक के बकरे बाजार में मौजूद है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के व्यापारी बकरे लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं, कमेला कॉलोनी की पशु मंडी में भारी तादाद में भैंसों की बिक्री हो रही है।
विज्ञापन
कुर्बानी के लिए कंबोह के पुल पर बकरा बाजार लगी हुई हैं। यहां पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के व्यापारी अलग-अलग नस्लों के बकरों को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मांग तोतापरी बकरे की है। पशु कारोबारी मोहम्मद वसीम का कहना है कि उनके पास तोता परी बकरा है। जिसका वजन 150 किलो है।
यह पूरे दिन में पांच लीटर दूध पीता है। सौ रुपये के गूलर के पत्ते, ढाई किलो चना और तीन सौ रुपये के फल खाता है। इस बकरे की मांग सबसे ज्यादा है। इसकी कीमत डेढ़ लाख रुपये है। कुर्बानी के लिए लोग तोतापरी बकरे को ही सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। उनके पास इस समय तोतापरी सहित करीब 70 बकरे मौजूद है। जिन्हें कुर्बानी के लिए बकरा बाजार में बेचने के लिए लाया गया है।
विज्ञापन
अभी तक सबसे मंहगा बकरा एक लाख तीस हजार में बिका
मौलाना कारी सैय्यद रिजवान नसीम
पशु कारोबारी मोहम्मद वसीम का कहना है कि अभी तक सबसे मंहगा बकरा एक लाख तीस हजार रुपये में बिका है। ईद-उल-अजहा के एक-दो दिन बाद तक बकरों के दाम बढ़ते और घटते रहेंगे। वहीं, कमेला कॉलोनी में भी पशु मंडी लगी हुई है। यहां पर भैंसों की खरीद-फरोख्त हो रही है। पशु व्यापारी अहसान कुरैशी का कहना है अभी तक मंडी में सात हजार से अधिक भैंसें बिक्री के लिए आ चुकी हैं। उनका कहना है कि कुर्बानी के लिए लोग अपने बजट के हिसाब से अलग-अलग जानवरों की खरीददारी कर रहे हैं।
बाजार में मौजूद इन नस्लों के बकरे
पशु कारोबारी मोहम्मद नवाब ने बताया कि कुर्बानी के लिए बाजार में अनेक नस्लों के बकरे आए हुए हैं। इनमें मूंड़ा, सिंग वाला, तोतापरी, अमृतसरी, कस्सी बकरे शामिल हैं। इनकी कीमत डेढ़ से पांच लाख रुपये तक है।
कुरान और हदीस के हिसाब से करें कुर्बानी
मदरसा मजाहिर उलूम (अरबी मदरसा) के नायब नाजिम हजरत मौलाना कारी सैय्यद रिजवान नसीम ने कहा कि कुरान और हदीस में फरमाया गया है कि कुर्बानी करना उस शख्स पर वाजिब है जो मुसलमान हो और उसकी कुर्बानी के लिए पूरी नीयत हो। कुर्बानी के लिए भैंस, बकरा, दुंबा और ऊंट का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन इन जानवरों में किसी तरह की बीमारी नहीं होनी चाहिए। जैसे जानवर अंधा न हो, सींग जड़ से टूटा ना हो, काना ना हो, लंगड़ा ना हो और इतना दुबला ना हो कि बीमार नजर आए।
ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर होने वाली कुर्बानी को लेकर देवबंदी उलमा ने एकता और भाईचारे को बरकरार रखने की अपील की है। उनका कहना है कि मुसलमान दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का खयाल रखते हुए गाय की कुर्बानी से परहेज करें। फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि जो हक हमें दस्तूर-ए-हिंद (भारतीय संविधान) ने दिया है, उसको ध्यान में रखते हुए बकरीद पर कुर्बानी करें। साथ ही कहा कि मुसलमान ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि कुर्बानी करते वक्त यह ध्यान रखना जरूरी है कि इससे किसी दूसरे धर्म के लोगों को जरा भी परेशानी न हो। कुरबानी अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए की जाती है। तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती याद इलाही का कहना है कि बकरीद पर गाय को छोड़कर दूसरे जानवरों की कुरबानी करें। गौरतलब है कि देश में सद्भाव मजबूत रखने के लिए दारुल उलूम ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के अनुरोध पर गाय की कुरबानी को लेकर फतवा भी जारी किया था।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें