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जीआईएस सर्वे : एक लाख से ऊपर वाले गृहकर बिल देगा नगर निगम

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- नगर आयुक्त ने गृहकर विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर बनाई रणनीति
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे द्वारा चिह्नित भवनों पर गृहकर वसूलने की तैयारी में अब नगर निगम जुट गया है। एक लाख से ऊपर गृहकर वाले 8.50 हजार भवनों को गृहकर बिल वितरित करने की योजना बनाई गई है। गृहकर विभाग के अधिकारियों को निर्देश देने से पहले नगर आयुक्त ने संयुक्त व्यापार संघ और भाजपा पार्षदों के साथ मंथन किया। नगर आयुक्त ने बिल के साथ स्वकर प्रपत्र देनेे की बात भी कही ताकि किसी बिल पर आपत्ति आए तो उसका तुरंत निस्तारण भी किया जा सके।
गृहकर वसूली में मेरठ नगर निगम प्रदेश में फिसड्डी है। प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने वीडियो कांफ्रेसिंग कर निगम अधिकारियों को फटकार लगाई और मेरठ को विकास कार्य के लिए पैसा देने से मना भी कर दिया। इसके बाद निगम की नींद टूटी। यहां व्यापारियों और पार्षदों ने जीआईएस सर्वे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर आपत्ति लगा दी थी। मामला तूल पकड़ने पर महापौर ने नगर निगम की बोर्ड बैठक में गृहकर बिल वितरित होल्ड कर दिए थे। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने गृहकर विभाग के अधिकारियों की मीटिंग ली। जिसमें जीआईएस सर्वे द्वारा चिह्नित भवनों पर गृहकर के बिल वितरित करने के निर्देश दे दिए।
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बताया गया कि एक लाख से ऊपर वाले गृहकर बिल वितरित होंगे। जिसमें महानगर में 8.50 हजार भवन है, जिन पर करीब 50 करोड़ रुपये गृहकर है। निगम ने 15 दिन बड़ा अभियान चलाकर 100 करोड़ की गृहकर वसूली करने का लक्ष्य रखा है। शास्त्रीनगर, कंकरखेड़ा और मुख्यालय नगर निगम परिसर में डेसबोर्ड बनाकर गृहकर जमा करने वालों को राहत पहुंचाने की बात कही है। गृहकर के अधिकारियों से पहले नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने व्यापारियों और पार्षदों के सामने भी वसूली कम होने की बात रखी है।

बिल के साथ फॉर्म देगा निगम
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम ने बताया कि गृहकर बिल वितरित करने के साथ एक फॉर्म भी निगम करदाताओं को देगा। एक लाख से ऊपर वाले बिल पर आपत्ति करने की सुविधा भी रहेगी ताकि अधिकारी आपत्ति का निस्तारण कर सके।
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गृहकर वसूली बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जीआईएस सर्वे द्वारा चिह्नित भवनों को एक लाख से ऊपर वाले गृहकर बिल वितरित करेंगे। साथ ही सत्यापन कराया जाएगा। आपत्ति का निस्तारण कराने के लिए अधिकारियों को लगाया गया है। - सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त
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पहले भौतिक सत्यापन, फिर बांटें जाए बिल
वार्डों में कैंप लगाकर गृहकर वसूली का अभियान चलाने की बात हुई है। जिन वार्डों में 15-20 प्रतिशत लोग ही गृहकर दे रहे है, पहले वहां अभियान चलाया जाए। जीआईएस सर्वे भ्रष्टाचार से लिप्त है, जिसके चलते उसे होल्ड किया गया था। पहले भौतिक सत्यापन होगा, आपत्तियों का निस्तारण होगा। तभी नये गृहकर का बिल वितरित करें, अन्यथा विरोध करेंगे।
- अजय गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघ
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