समाज को अपनी सोच बदलनी होगी
शिक्षिका पूजा वर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्यक्रम किए जाते हैं, लेकिन आज भी आन, बान के लिए लड़कियों की हत्या तक कर दी जाती है। समाज को अपनी सोच बदलनी होगी। वहीं लड़कियों का भी कर्तव्य है कि वह अपने चरित्र पर किसी को उंगली उठाने का अवसर न दें।
सामाजिक और आर्थिक रूप हैं आत्मनिर्भर
शिक्षिका श्रद्धा यादव ने कहा कि आज महिला सामाजिक व आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। महिलाओं को अपने परिवार और कार्यक्षेत्र के बीच समन्वय बनाए रखना चाहिए तभी वह अपराजिता हो पाएगी।
शोषण के खिलाफ बुलंद करनी होगी आवाज
शिक्षिका प्रियंका के अनुसार महिलाओं को अपने किसी भी शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करनी चाहिए। हमारा कर्तव्य बनता है कि न तो अपना शोषण होने दें और न ही अन्य किसी का शोषण बर्दाश्त करें।
निरंतर प्रयास है जरूरी
शिक्षिका प्राची चौहान ने अमर उजाला के अपराजिता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सोच बदलने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।
अभियान से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
छात्रा दिव्यांशी ने कहा कि विद्यालय में हुए अपराजिता कार्यक्रम से उन्हें नारी शक्ति का एहसास हुआ है। इससे उन्हें बिना डरें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।
जागरुक हो रही हैं महिलाएं
छात्रा विशाखा का कहना है कि अमर उजाला खबरों के साथ, सामाजिक दायित्वों को निभाने में भी नंबर एक पर है। इस अभियान से महिलाएं जागरुक हो रही हैं।
वक्त के साथ समाज की बदली है सोच
छात्रा उमरा का कहना है कि वक्त के साथ समाज की सोच भी बदली है। पहले अभिभावक बेटियों को बाहर पढ़ने भेजने में संकोच करते थे, लेकिन आज वह परिवार से दूर अकेले विदेशों तक शिक्षा ले रहीं हैं। समाज की सोच में यह बदलाव अच्छी बात है।
भ्रूण हत्या रोकने के लिए और करने होंगे प्रयास
अदिति राठी व अदिति चौहान का कहना है कि गिरता लिंगानुपात चिंता का विषय है। समाज में भ्रूण हत्या रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि घर में जब बेटियां ही नहीं होंगी तो बेटे के लिए बहु कहां से आएगी, इस बात को सभी अच्छे ढंग से समझना होगा।
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