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विश्व में छा गईं मेरठ के शिक्षकों की किताबें, इन आठ देशों के सिलेबस में विज्ञान की बुक्स

Tue, 23 Apr 2019 07:19 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ के शिक्षकों की लिखी किताबें देश ही नहीं बल्कि विदेशों के विश्वविद्यालयों में भी पढ़ाई जा रही हैं। नेपाल से लेकर पाकिस्तान, सिंगापुर, दुबई, भूटान, हांगकांग, मॉरीशस और इंग्लैंड में मेरठ के शिक्षकों की विज्ञान की किताबें विश्वविद्यालयों के सिलेबस में हैं। इन किताबों को लिखने वालों में सबसे ज्यादा शिक्षक मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर रहे हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी इनकी किताबों की मांग वैश्विक स्तर पर है। आज विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस पर शहर के ऐसे ही लेखकों की जानकारी देती यह स्टोरी, जिन्होंने अपने ज्ञान और कलम की प्रतिभा से देश-विदेश में नाम कमाया। 

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मेरठ कॉलेज ए फैकल्टी ऑफ पब्लिकेशन। साल 2005 में जब नैक की टीम मेरठ कॉलेज में निरीक्षण करने आई तो सदस्यों ने यही कहा था कि इस कॉलेज के शिक्षकों का कोई सानी नहीं है। यहां के शिक्षकों की किताबें देश-दुनिया के विश्वविद्यालयों में जगह बनाए हुए हैं। मेरठ कॉलेज के अलावा कई दूसरे कॉलेजों के शिक्षकों की किताबें भी देशभर के विश्वविद्यालयों के सिलेबस में हैं।

हर विषय की किताबों का डंका
मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर रहे स्वर्गीय प्रो. एमएल खन्ना की मैथमेटिक्स प्रतियोगिता, खन्ना सीरिज ऑफ मैथमेटिक्स, प्रो. पीएन चटर्जी की मैथ सीरीज फॉर डिग्री क्लासेज देशभर के विश्वविद्यालयों-कॉलेजों के सिलेबस में है। मेरठ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य स्वर्गीय डॉ. जेएन गुर्टू की इन आर्गेनिक केमेस्ट्री, और फिजिकल केमेस्ट्री देशभर के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। एसएल गुप्ता एंड कुमार की हैंड बुक्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स क्लासिकल मैकेनिक्स देश और विदेशों के तमाम विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। इसके अलावा प्रो. कोटपाल की जूलॉजी और डॉ. पीएस वर्मा की सेल बायोलॉजी कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। डॉ. कीमती लाल हों या इकॉनोमिक्स के प्रोफेसर आनंद स्वरूप गर्ग। मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर रहे स्वर्गीय डॉ. आरएन शर्मा की दर्शनशास्त्र की किताबें भी सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं। साइंस के अलावा मेरठ के शिक्षकों की सोशोलॉजी, मनोविज्ञान और राजनीतिक विज्ञान में लिखी किताबें देश के सभी कॉलेजों में पढ़ाई जाती हैं।

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लता मंगेशकर की किताबों का अनूठा संग्रह 
शहर में किताबों के लेखक ही नहीं बल्कि पाठक भी खूब हैं। फूलबाग कॉलोनी निवासी गौरव शर्मा के पास सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर के जीवन से जुड़ी 100 से अधिक पुस्तकें हैं। इसमें हरीश भिमानी द्वारा रचित लता दीदी अजीब दास्तां हैं ये किताब के चार भाषाओं के वर्जन हैं। रिदम वागोलीकर की पहली राउंड कॉफी टेबल बुक, ऑन स्टेप्स विद लता मंगेशकर मोहन देवड़ा, लता मंगेशकर ऑटोबायोग्राफी बाय राजू भारतानन, ऐसा कहां से लाऊं पदमा सचदेवा, नसरीन मुन्नी कबीर की लता मंगेशकर इन हर ऑन वॉयस, यतिंद्र मिश्र की लता सुरगाथा, रेखा चर्बर की मराठी पुस्तक लता मंगेशकर, लता वॉयस ऑफ द गोल्डन एरा के हिंदी, मराठी, अंग्रेजी, पंजाबी, बांग्ला, कन्नड़, मलयालम के संस्करण सहित तमाम पुस्तकें हैं। आठ सालों की कठोर मेहनत से गौरव ने यह किताबें देश के विभिन्न हिस्सों से जुटाई हैं। 

इसलिए मनाते हैं विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस
हर वर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस मनाया जाता है। युवाओं में किताबें पढ़ने का आकर्षण पैदा करने के लिए भी यह दिवस मनाया जाता है। 23 अप्रैल 1995 को इस दिवस की शुरुआत हुई थी। हालांकि इस दिन को मनाने की नींव तो 1923 में स्पेन में पुस्तक विक्रेताओं ने रख दी थी। मशहूर लेखक मीगुयेल डी सरवेन्टीस को सम्मानित करने के लिए इस दिन की नींव रखी गई। 23 अप्रैल को ही इस मशहूर लेखक की मृत्यु हुई थी। कहते हैं कि मध्यकाल में 23 अप्रैल को प्रेमी अपनी प्रेयसी को गुलाब भेंट करता था तो प्रेमिका उसे बदले में पुस्तक देती थी। 23 अप्रैल को कई साहित्यकारों का जन्म हुआ। इसमें शेक्सपीयर, सरवेन्टीस, ब्लेडीमीर, मारिसेड्रयेन, के लक्तनेस व जोसेफ प्ला प्रमुख हैं। शेक्सपीयर का जन्म और निधन दोनों ही 23 अप्रैल को हुआ था। 100 से अधिक देशों में हर वर्ष यह दिन मनाया जाता है।

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