यहां सोमवार सुबह उसने अपनी मुंह बोली बहन पारुल के घर किशोरी को छोड़ा और उससे पूछताछ करने के लिए कहा। किशोरी ने अपने नाम के अलावा पता कराची पाकिस्तान बताया। वह माता-पिता का नाम और फोन नंबर नहीं बता पाई।
निखिल और उसकी मां शाम को किशोरी को जीआरपी थाने लेकर पहुंचे। जीआरपी की पूछताछ में निखिल ने कहा कि वह मदद के लिए किशोरी को घर ले गया था। जीआरपी ने देर रात तक युवक के बयान दर्ज किए और किशोरी को महिला कांस्टेबल की देखरेख में रखा।
सूचना पर एलआईयू की टीम ने जीआरपी थाने पहुंचकर युवती से पूछताछ की। इसके बाद पूरा मामला सामने आया। किशोरी के पास से उसके भाई का मोबाइल नंबर मिला। इस पर संपर्क किया तो पता चला कि वह मानसिक रूप से बीमार है।
पता चला कि उसका असली नाम कुछ और है। उसने पहले अपना गलत नाम बताया था। पुलिस ने उसके परिजनों को मुरादाबाद बुलाया है। इसके अलावा निखिल व किशोरी से देर रात तक पूछताछ की जाती रही। इसके बाद परिजनों के पहुंचने पर किशोरी को उन्हें सौंप दिया गया।
12वीं की छात्रा है किशोरी
मेरठ निवासी किशोरी 12वीं की छात्रा है। उसने निखिल को बताया था कि वह पाकिस्तानी के कराची की नागरिक है। भारत में अपने मामा के अलावा एक सहेली का भी जिक्र किया। उधर, निखिल का कहना है कि वह शिमला से लौटते समय बस से देहरादून पहुंचा था, वहां से उसका ट्रेन में मुरादाबाद के लिए रिजर्वेशन था।