शामली। जिले में किसान गन्ने के खेती के साथ-साथ पशुपालन कर भी आमदनी बढ़ा रहे हैं। जिले में गिर, साहीवाल, थारपारकर नस्ल की गाय एक दिन में 15 से लेकर 16 लीटर तक दूध दे रही है।
मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र पशुपालकों का सत्यापन किया गया तो एक दिन में 16 लीटर तक विभिन्न प्रजातियों की गायों का दूध रिकॉर्ड किया गया। जिले के 59 पशुपालकों के खाते में विभागीय अधिकारियों की तरफ से 7.30 लाख रुपये भेजे गए हैं। हालांकि, जिले के किसी भी किसान ने गंगातीरी नस्ल की गाय पालना मुनासिब नहीं समझा।
दरअसल, हाल ही में पशुपालकों में उच्च उत्पादकता एवं गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायों (गिर, साहीवाल, हरियाणा, गंगातीरी तथा थारपारकर) को पालने के प्रति प्रोत्साहित करने, उनकी नस्ल सुधार, उनकी बेहतर देखभाल के उद्देश्य से नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना शुरू हुई है।
योजना के तहत योगी सरकार दस से पंद्रह हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस धनराशि को दो भागों में बांटा गया है। इसमें साहिवाल, गिर और थारपारक गाय द्वारा आठ से 12 लीटर प्रतिदिन दूध देने पर दस हजार रुपये और इससे ज्यादा प्रतिदिन दूध देने पर 15 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे। वहीं, हरियाणा की गाय द्वारा प्रति दिन छह से दस लीटर दूध देने पर दस हजार और दस लीटर से ज्यादा दूध देने पर पंद्रह हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा गंगातीरी गाय के 6 से 8 लीटर प्रति दिन दूध देने पर दस हजार और आठ लीटर से ज्यादा दूध देने पर 15 हजार रुपये दिये दिए जाने का नियम है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी चंद्रभानू कश्यप ने बताया कि जिले के पशुपालकों ने गिर, साहीवाल, थारपारकर नस्ल की गाय पालकर योजन का लाभ लिया। सर्वे के दौरान सामने आया है कि उक्त नस्ल की पशुपालकों द्वारा पाली गई गायों ने 13 से लेकर 16 लीटर तक दूध एक दिन में दिया। योजना के तहत जिले के 148 लोगों को पात्र माना गया था, जिसमें से 59 के खाते में 7.30 लाख की राशि भेजी गई है। 42 पशुपालकों की गाय ने 10 लीटर से अधिक दूध दिया जबकि 17 पशुपालक ऐसे रहें, जिनके पशुओं ने 16 लीटर तक दूध दिया।
इनके खाते में पहुंचे रुपये
पिंडौरा गांव के राजीव को दस हजार, पिंडौरा के शेर सिंह को 25 हजार, पिंडौरा के राजेश को दस, शामली के बीरबल को दस हजार, शामली की मोनिका देवी को 15 हजार, मालैंडी के श्याम सिंह को 15, मुंडेटकलां के श्याम सिंह, ओमबीर सिंह, संजीव कुमार लिसाढ़ को दस, जलालाबाद के ज्ञानेंद्र को दस हजार, कांधला के हर्ष को 15 हजार, कांधला के सुभाष को 15 हजार, कैराना के प्रदीप कुमार के खातों में 15 हजार रुपये भेजे गए।
एक बार ही उठा सकेंगे योजना का लाभ
योजना स्वदेशी नस्ल की गायों के पहले, दूसरे और तीसरे ब्यात पर लागू होती है। इस योजना का लाभ प्रदेश के प्रगतिशील पशुपालक अधिकतम 2 गायों पर उठा सकते हैं। योजना का उद्देश्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि करके प्रदेश के पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है। लाभार्थी को गाय की ब्यात की तिथि से 45 दिन के अन्दर आवेदन करना होता है।
सरसों का तेल, गेंहू, जौ को दिनचर्या में किया शामिल
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि सर्वे के दौरान सामने आया है कि जिन पशुपालकों की गाय 15 लीटर तक दूध दे रही है, वे पशुओं को जौ, गेहूं के अलावा सरसों का तेल, नमक का सेवन कराते हैं। चारे में प्रतिदिन खल, चोकर, चना का प्रयोग करते हैं।किसानों के पशुपालकों की देखभाल के तौर तरीकों को अब विभिन्न गांवों में कार्यक्रम आयोजित कर जागरूक किया जा रहा है। प्रगतिशील किसान भभीसा गांव के देवेंद्र सिंह, चौसाना के मनीष का कहना है कि समय पर चारा और अन्य सामग्री यदि पशुओं को दी जाए तो आसानी से 15 से लेकर 17 लीटर तक दूध एक दिन में पाया जा सकता है।उनकी गाय वर्तमान में साढ़े 16 लीटर तक दूध दे रही है।