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घड़ियालों को भायी गंगा, दूर तक कर रहे अठखेलियां

Thu, 02 Nov 2017 03:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ विपिन धनकड़, मेरठ
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घड़ियालों को भायी गंगा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ में गंगा की इकोलॉजी बेहतर बनाने के लिए आठ साल पहले गंगा में छोड़े गए घड़ियालों को गंगा भा गई है। साल दर साल अब तक गंगा में 678 घड़ियालों को छोड़ा जा चुका है। घड़ियालों की सेहत पर चल रही रिसर्च के मुताबिक दूसरी नदियों के मुकाबले गंगा में ये स्तनधारी सबसे तेज वृद्धि कर रहा है। गंगा में सबसे लंबा घड़ियाल 3.30 मीटर लंबा है। इसका वजन 85 किलो है। मेरठ के मकदूमपुर से लेकर मिर्जापुर तक 865 किलोमीटर तक गंगा में यह मटरगश्ती कर रहे हैं। सर्दी का सीजन आ गया है। अब इनकी नई खेप छोड़ने की तैयारी है।  
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हस्तिनापुर सेंक्चुरी में 2009 में डब्लूडब्लूएफ (विश्व प्रकृति निधि) ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट था। हालांकि गंगा में पहले भी घड़ियाल थे। लेकिन प्रदूषण व अन्य कारणों से धीरे-धीरे वह खत्म हो गए। अलग-अलग खेप में आठ सालों में 678 घड़ियाल गंगा में छोड़े जा चुके हैं। गंगा में छोड़ने के समय इनकी उम्र करीब तीन से साढ़े तीन साल होती है। गंगा में करीब 12 साल उम्र तक के घड़ियाल हो चुके हैं। डाउनस्ट्रीम से लेकर अपरस्ट्रीम तक यह फैले हैं। इनके रूट और हैबिटेट का पता लगाने के लिए इनमें ट्रांसमीटर लगाए गए है। वृद्धि का पता करने के लिए बायोमैट्रिक्स की जा रही है। जिसमें इनको पकड़कर नाप-तौल की जाती है। 

आईडी में दर्ज है डाटा
हर घड़ियाल को एक आईडी दी गई है। जिस पर उसका डाटा दर्ज है। बायोमैट्रिक्स में आईडी से घड़ियाल की डिटेल पता चलती है। घड़ियाल प्रोजेक्ट के इंचार्ज संजीव यादव के मुताबिक गंगा में घड़ियालों की वृद्धि उम्मीद से भी अच्छी है। ऐसी वृद्धि घाघरा, चंबल, केन और रामगंगा में दर्ज नहीं हुई। गंगा का यह सफाई कर्मचारी कई मायनों में फायदेमंद सिद्ध हो रहा है। गंगा में कई जगह ऐसी चिह्नित की गई हैं, जहां घड़ियाल ग्रुप बनाए हुए हैं। इससे उनके हैबिटेट का पता चल रहा है।  
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कैनाल से रेस्क्यू किया घड़ियाल
हाल में 27 अक्तूबर को गंगा कैनाल से एक घड़ियाल रेस्क्यू किया गया। इसका आईडी नंबर 3741 है। 2015 में इसको छोड़ा गया था। तब इसकी लंबाई 141 सेंटीमीटर और वजन साढ़े छह किलो था। अब लंबाई 2.08 मीटर और वजन 16.5 किलो है। उसमें तीन साल में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। बता दें कि घड़ियालों की औसत आयु करीब 90 साल होती है। घड़ियाल और कछुआ से गंगा की इकोलॉजी बेहतर हो रही है। दो हजार कछुए भी गंगा में छोड़े जा चुके हैं।
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