परिजनों के अनुसार पुलिस ने किशोरी को थाने में रखकर परिजनों को घर भेज दिया। आरोप है कि पुलिस ने अब तक न तो पीड़ित किशोरी का मेडिकल कराना मुनासिब समझा और न ही एफआईआर दर्ज कर उसके बयान कराए। उल्टे पीड़िता को अवैध हिरासत में रखते हुए उस पर बयान बदलने का दबाव डाला जा रहा है।
वहीं, पीड़ित परिजन कार्रवाई के लिए रविवार से ही थाने के साथ ही अफसरों के भी चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में इंस्पेक्टर कोतवाली अनिल कपरवान ने बताया कि मामला संदिग्ध लग रहा है। आरोपियों के साथ पीड़ित पक्ष का पुराना विवाद चल रहा है। पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है, जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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