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गंगा भारतीय संस्कृति की जीवनधारा : स्वामी विवेकानंद

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जानीखुर्द। गुरूकुल प्रभात आश्रम में प्रवचन सुनते ग्रामीण फोटो संवाद - फोटो : खूटेहना प्राथमिक स्वास्य केंद्र पर मरीजों को देखते चिकित्सक।
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जानीखुर्द। गंगा दशहरा पर्व पर गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी में भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने यज्ञ में आहुति देकर और विद्वानों के विचार सुनकर पुण्य लाभ कमाया।
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गुरुकुल प्रभात आश्रम के कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज ने गंगा दशहरा का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवनधारा है। हम सभी का यह परम कर्तव्य है कि हम गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने में अपना योगदान दें। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से पर्यावरण और नदी संरक्षण के प्रति जागरुक रहने का आह्वान किया।
इस आध्यात्मिक समागम में पुंडरी (हरियाणा) से पधारे स्वामी बलेश्वरानंद महाराज ने भी श्रद्धालुओं को अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को धर्म, निस्वार्थ सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। प्रवचन और आशीर्वचन के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगनहर में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। उपस्थित लोगों ने गंगा और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त रखने का सामूहिक संकल्प लिया। भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
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