गंगा एम्सप्रेसवे : कागजों की जांच के बाद ही कराएं बैनामा
मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे के लिए अब रोजाना बैनामा कराने के लिए प्रशासन जुट गया है। मुख्यमंत्री की ओर से भी पहले 100 किसानों को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए किसान भी आगे आकर बैनामा करा रहे हैं। हालांकि, सोमवार को एक भी बैनामा नहीं हुआ। वहीं, शाम को एडीएम प्रशासन ने लेखपाल और कानूनगो की बैठक लेकर दिशा-निर्देश दिए।
मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे के लिए नौ गांवों का जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसमें उन गांवों के सबसे पहले बैनामे कराए जा रहे हैं, जहां किसानों को कोई आपत्ति नहीं है। एडीएम प्रशासन मदन सिंह ने कहा कि बैनामे कराने के समय सभी कागजात की जांच अवश्य कर ली जाए, जिससे बाद में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोप न लग सकें। इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। शासन के निर्देशानुसार जून-2021 तक हर हाल में एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण पूरा किया जाना है। वहीं, जिन गांवों के किसान नाराज हैं उन्हें भी काउंसिलिंग कर मनाकर बैनामे कराने का कार्य शुरू कराया जाए।
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मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर दो दुकानें ध्वस्त
परतापुर। मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर डासना से लेकर परतापुर चौराहे तक सड़क के दोनों तरफ रेडियम पट्टी और लाइटों को लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं, भूड़बराल रजबहे के पास सड़क चौड़ीकरण में बाधा बनी रही दो दुकानों को कार्यदायी संस्था जीआर इंफ्रा के दस्ते ने ध्वस्त कर दिया। हालांकि दुकानों के बराबर में स्थित संतोषी माता का मंदिर सुरक्षित है। इसे मंगलवार को ध्वस्त किया जा सकता है। वहीं, ध्वस्त दुकानों के मालिक प्रमोद कुमार का कहना है कि उसे दुकानों का मुआवजा नहीं दिया गया। इससे पहले भी चार दुकानें ध्वस्त करा दी गई थीं, लेकिन उनका मुआवजा भी नहीं दिया गया। संवाद
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प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जमीन अधिग्रहण घोटाले में साढ़े तीन साल के बाद फिर से दो नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। जमीन अधिग्रहण कानून की धारा-3 डी के बाद भी बैनामे किए जाने को लेकर एक्सप्रेसवे के एक अधिकारी पर धोखाधड़ी की धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। थाना मसूरी में पहली रिपोर्ट गाजियाबाद के विजयनगर निवासी गौरव शर्मा व नौ अन्य की तहरीर जबकि दूसरी ग्राम घुघरावली कोतवाली देहात जिला बुलंदशहर निवासी भोपास सिंह व चार अन्य की शिकायत पर दर्ज हुई है।
कमिश्नर की जांच में हुआ था खुलासा
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का निर्माण समय पर पूरा न हो पाने के पीछे एक वजह घोटाला भी रहा है। अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों ने मिलकर धारा-3 डी के बाद एक्सप्रेसवे में अधिग्रहीत होने वाली जमीन को खरीदा और फिर एनएचएआई को बाजार मूल्य से चार गुना पर बेच दिया। वर्ष 2017 में तत्कालीन मंडलायुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार की ओर से मामले में जांच कराई गई तो पूरे खेल में कई बड़े लोगों के शामिल होने का खुलासा हुआ। जांच के बाद अक्तूबर 2017 में थाना कविनगर में 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसमें तत्कालीन एडीएम घनश्याम सिंह, उनके बेटे शिवांग राठौर, तत्कालीन अमीन संतोष कुमार, पत्नी लोकेश बेनीवाल आदि के नाम शामिल थे।