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Meerut News: डिजिटल अतीत की गलतियों से मुक्ति का मिले अधिकार

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वर्ल्ड कांग्रेस में सीसीएसयू के प्रो. आशीष कौशिक ने भूल जाने के अधिकार पर दिया व्याख्यान
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के लीगल स्टडीज संस्थान के सहायक प्रोफेसर आशीष कौशिक ने ब्राजील के इटाउना विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित वर्चुअल वर्ल्ड कांग्रेस में व्याख्यान दिया।
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उन्होंने भूल जाने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का एक उभरता आयाम विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने डिजिटल युग में व्यक्ति की निजता, गरिमा और नई शुरुआत के अधिकार को लेकर विचार रखे। प्रो. कौशिक ने कहा कि डिजिटल तकनीक की स्थायी स्मृति व्यक्ति के अतीत को लंबे समय तक सार्वजनिक बनाए रख सकती है। इससे उसकी गरिमा, बदलती पहचान और व्यक्तिगत स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि भूलना मानव विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जबकि डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज पुरानी गलतियां व्यक्ति के लिए सामाजिक कलंक का कारण बन सकती हैं। उन्होंने यूरोपीय न्यायालय के 2014 के ‘गूगल स्पेन’ फैसले और यूरोपीय संघ के जीडीपीआर के अनुच्छेद 17 का उल्लेख करते हुए भारत में डेटा संरक्षण कानून के विकास पर प्रकाश डाला। प्रो. कौशिक ने डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के माध्यम से आनुपातिकता परीक्षण, दुर्भावनापूर्ण आवेदनों पर रोक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के संरक्षण के लिए न्यायिक निगरानी में केंद्रीकृत ऑफलाइन डिपॉजिटरी बनाने की सिफारिश की।
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