मैसेज में कहा गया कि ई-गिफ्ट कार्ड खरीदने के बाद उसका लिंक शेयर कर दें। यह भी कहा गया कि जब खरीदारी कर लें तो सूचित कर दें। इसके बाद डीएम मेरठ का सीयूजी नंबर लिखा गया। ये मेसेज कई अधिकारियों के पास पहुंचा तो वे हैरान रह गए।
हालांकि वो समझ गए कि कोई जालसाज ये हरकत कर रहा है। अधिकारियों ने डीएम को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने एसएसपी को कॉल करके आरोपी का नंबर सर्विलांस पर लगवाया।
डीएम दीपक मीणा ने अधिकारियों से कहा कि इस तरह का कोई मेसेज आए तो पुलिस से शिकायत करें। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि साइबर सेल आरोपी का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
पहले भी कई बार मांगे जा चुके हैं रुपये
ये पहला मामला नहीं है। सात साल पहले तो जालसाजों ने आईजी मेरठ के सीयूजी नंबर का ही क्लोन बनाकर तमाम सीओ और थानेदारों से पैसे मांग लिए थे। कई थानेदारों ने जब अकाउंट में पैसे डलवा दिए तब जालसाजी का पता चला। ये कॉल इंटरनेट से की गई थी। इसके अलावा फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर खूब फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
ऐसे मेसेज आने पर क्या करें
अगर किसी अंजान नंबर या सोशल साइट से इस तरह का कोई मेसेज आता है तो संबंधित व्यक्ति के मोबाइल पर फोन करके इसकी पुष्टि करें कि वो मेसेज उन्हीं ने भेजा है। ऐसे जालसाजों के बारे में पुलिस को सूचना दें।